बिना प्रशिक्षण शिक्षकों की ड्यूटी लगाने से असमंजस, निर्णय रद्द करने की उठी मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सीबीएसई द्वारा हिमाचल प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकों की पेपर मूल्यांकन ड्यूटी लगाने के निर्णय पर विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ बिलासपुर ने इस फैसले पर रोष व्यक्त करते हुए इसे शिक्षकों के लिए भ्रम की स्थिति पैदा करने वाला बताया है।
संघ के जिला अध्यक्ष नरेश ठाकुर, वरिष्ठ उप प्रधान बलवंत ठाकुर, महासचिव सुशील चंदेल, वित्त सचिव विकास चौहान सहित अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि जिला बिलासपुर के जिन विद्यालयों को सीबीएसई से संबद्ध किया गया है, वहां कार्यरत शिक्षकों को ईमेल और फोन के माध्यम से सूचना दी जा रही है कि उनकी ड्यूटी सीबीएसई पेपर चेकिंग में लगाई गई है। उन्होंने बताया कि संबंधित शिक्षक अभी तक हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों में कार्य कर रहे हैं और उन्हें सीबीएसई मूल्यांकन प्रणाली का कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। पदाधिकारियों का कहना है कि बिना प्रशिक्षण शिक्षकों से सीबीएसई उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करवाना न केवल उनके लिए कठिन होगा बल्कि इससे मूल्यांकन की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है। इस तरह की व्यवस्था से शिक्षकों में असमंजस बढ़ेगा और परीक्षा संबंधी कार्य प्रभावित हो सकते हैं। चिंता जताई कि यदि शिक्षकों को सीबीएसई पेपर जांच में लगाया जाता है तो वे राज्य बोर्ड की परीक्षाओं के संचालन और मूल्यांकन कार्य में अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा पाएंगे। इससे दोनों बोर्डों की परीक्षाओं के सुचारू संचालन पर असर पड़ने की आशंका है। संघ ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि शिक्षकों की सीबीएसई पेपर चेकिंग ड्यूटी को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए, ताकि वे अपने मूल कार्य और राज्य बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े दायित्वों का निर्वहन कर सकें। संघ ने यह भी सवाल उठाया कि एक ओर विभाग सीबीएसई संबद्ध विद्यालयों के स्टाफ का परीक्षण करना चाहता है, जबकि दूसरी ओर सीबीएसई उन्हीं शिक्षकों को पूरी तरह योग्य मानकर मूल्यांकन कार्य सौंप रहा है, जो परस्पर विरोधाभासी स्थिति है।