नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से फोरलेन विस्थापितों को मिली हल्की सी राहत के बाद अब ग्रामीण फोरलेन सड़क के कार्य में लगी कंपनी के खिलाफ मुखर होने लगे हैं। सोमवार को फोरलेन विस्थापितों ने तुन्नू, पट्टा, ढल्यार में बैठकों का आयोजन करते हुए आंदोलन की रणनीति बनाई।
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने बताया कि एनजीटी ने विस्थापितों को कुछ राहत प्रदान की है। अब सभी लोगों को एकजुट होना पड़ेगा। तभी इस संघर्ष को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में दायर याचिका पर अदालत ने दो हफ्ते में अवैध डंपिग की रिपोर्ट के लिए पर्यावरण, वन, प्रदूषण नियंत्रण विभाग और बीबीएमबी को आदेश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि फोरलेन सड़क निर्माण में जुटी कंपनी विस्थापितों एवं प्रभावितों के हितों की अनदेखी कर रही है। इसमें जिला प्रशासन कंपनी का पूरा सहयोग कर रहा है। प्रशासन आम जनता की समस्या को दूर करने के बजाय ग्रामीणों को तंग कर रहा है।
उन्होंने कहा कि किरतपुर से नेरचौक बाकायदा बैठकों का आयोजन कर लोगों को एक मंच पर लाने के लिए कवायद शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि जब तक सभी फोरलेन विस्थापित और प्रभावित एक मंच पर नहीं आते, तब तक इस संघर्ष को सही दिशा मिल पाना मुश्किल है।
ग्रामीणों ने भी समिति का सहयोग करने का संकल्प लिया है। मदन लाल ने बताया कि इस बैठक में बाबू राम, दिला राम, रामांनद, रत्न लाल, सुख राम, जगदीश, रणजीत सिंह, रूप लाल, रामलाल, छोटा राम, बाबू राम, अनिल कुमार, ज्ञान चंद, जय चंद, सीता राम, दिलीप सिंह, कृष्ण राम, रोशन लाल सहित कई ग्रामीण मौजूद थे।