- विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण लोग परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। जिले में गर्मी बढ़ते ही डायरिया के मरीज अस्पतालों में आने लगे हैं। घुमारवीं अस्पताल में रोजाना आठ से दस मरीज उल्टी, दस्त और बुखार से संबंधित बीमारी के पहुंच रहे हैं। बच्चों में डायरिया के लक्षण ज्यादा सामने आ रहे हैं।
बीते माह 139 मरीज डायरिया के मामले अस्पताल पहुंचे। घुमारवीं अस्पताल में रोजाना औसतन तीन सौ के करीब ओपीडी हो रही है। विभाग भी हर स्थिति से निपटने के लिए भी मुस्तैद है, लेकिन अस्पताल में भीड़ ज्यादा होने के कारण मरीजों को एक्सरे और खून जांच के लिए लाइनों में खड़े होना पड़ रहा है। सुविधाओं की कमी के कारण एक्स-रे वाले कमरे के बाहर मरीज जमीन पर बैठने के लिए मजबूर हैं। घुमारवीं अस्पताल में मंगलवार दोपहर 1 बजे तक 250 मरीज स्वास्थ्य जांच के लिए पहुंच चुके थे। इनमें से औसतन 10 मरीज डायरिया के थे। अस्पताल में टेस्ट करवाने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं। रोजाना 80 से 100 लोगों के खून की जांच हो रही है। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक्सरे की बात की जाए तो तकरीबन 80 एक्सरे हो रहे हैं। एक्सरे के लिए दो कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन एक कर्मचारी के छुट्टी पर चले जाने से अब अकेला कर्मचारी एक्सरे का कार्य कर रहा है। इस कारण एक्सरे रूम के बाहर मरीज जमीन पर बैठने के लिए मजबूर हैं।
इसके अलावा खून जांच के लिए भी रोजाना 100 के करीब सैंपल जमा हो रहे हैं। 12 बजे तक सैंपल जमा होने के बाद दो बजे के बाद सैंपल की रिपोर्ट उपलब्ध होती है। अस्पताल में एकाएक मरीजों की संख्या बढ़ जाने के कारण खून जांच के लिए भी लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है। ज्यादा भीड़ होने के कारण वहां बैठने के लिए लगाए गए बेंच भर जाते हैं। इसके बाद मरीजों और तीमारदारों को खड़े रहकर ही अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। घुमारवीं अस्पताल में इस समय 10 के करीब डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं। बीते माह 10 हजार मरीज घुमारवीं अस्पताल इलाज के लिए पहुंचे। आंकड़ा देखा जाए तो औसतन चार सौ मरीज रोजाना बीते माह अस्पताल इलाज के लिए पहुंचे।
गर्मी के कारण फैलने वाले डायरिया से निपटने के लिए विभाग ने तैयारी कर ली है। डायरिया बचाव के लिए लोगों को जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। बीएमओ घुमारवी डॉक्टर पुष्पेंद्र ने कहा कि डायरिया से बचने के लिए स्वच्छ पानी पीएं। पेयजल स्रोतों को साफ रखें। इसके अलावा शौचालय में सफाई का ध्यान रखें और पानी की समय-समय पर टेस्टिंग करवाएं। उन्होंने कहा कि रोजाना कुछ मामले डायरिया के आ रहे हैं। आंकड़ा ज्यादा नहीं है, लेकिन विभाग फिर भी पूरी तरह से नजर बनाए हुए है। उपमंडल के हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से रिपोर्ट रोजाना ली जा रही है।