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Bilaspur News: श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग सुन लीन हुए श्रद्धालु

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कथा व्यास पंडित जीवानंद शैल। संवाद
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टिकरी पंजगाईं में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास ने सुनाया भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। श्री सदाशिव मंदिर टिकरी पंजगाईं में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन रविवार को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग सुनाया गया। भागवत व्यास पंडित जीवानंद शैल ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से संस्कार और धर्म की सीख लेने का संदेश दिया।
कथा व्यास ने कहा कि श्रीकृष्ण स्वयं जानते थे कि वह परमात्मा हैं, इसके बावजूद उन्होंने कभी अपने माता-पिता के चरणों में प्रणाम करने में संकोच नहीं किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से मनुष्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के महत्व को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर अत्याचार, दुराचार और पापाचार बढ़ा है, तब-तब भगवान ने अवतार लेकर धर्म की स्थापना की है। मथुरा के राजा कंस के अत्याचार बढ़ने पर धरती की करुण पुकार सुनकर भगवान विष्णु ने देवकी के अष्टम पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। इसी प्रकार त्रेता युग में रावण के अत्याचारों से धरती व्यथित हुई तो भगवान श्रीराम ने अवतार लेकर अधर्म का नाश किया।
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व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी की लीला का आध्यात्मिक अर्थ बताते हुए कहा कि गोपियों के घर से माखन चुराना केवल एक लीला नहीं, बल्कि सार तत्व को ग्रहण करने का संदेश है। उन्होंने कहा कि सृष्टि का वास्तविक सार परमात्मा है। इसलिए नश्वर भौतिक पदार्थों की प्राप्ति में समय, साधन और सामर्थ्य व्यर्थ करने के बजाय मनुष्य को अपने भीतर स्थित परमात्मा को प्राप्त करने का लक्ष्य रखना चाहिए। इसी में जीवन का कल्याण संभव है।
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