-बोले, अन्य विभागों में भी लागू है दो स्तरीय पदोन्नति प्रणाली
-संघ से चर्चा किए बिना ही सरकार को सौंप दी बलवान कमेटी ने रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। उपायुक्त कार्यालय कर्मचारी संघ बिलासपुर इकाई ने प्रदेश सरकार को चेतावनी दी कि यदि पटवारी कानूनगो संघ की मांगों के अनुसार नायब-तहसीलदार पदोन्नति में उनके कोटे में बदलाव किया गया तो संघ आंदोलन का रास्ता अपनाएगा।
संघ ने बताया कि सरकार ने 20 अगस्त 2024 की अधिसूचना के तहत अतिरिक्त सचिव राजस्व बलवान चंद की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति का गठन किया था। इस समिति को पटवारी कानूनगो संघ की मांगों की समीक्षा कर विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने को कहा गया था। पटवारी कानूनगो संघ ने अपनी प्रमुख मांगों में नायब-तहसीलदार के पद पर पदोन्नति में लिपिक वर्ग के 20 प्रतिशत कोटे को समाप्त कर इसे 60 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत करने का अनुरोध किया था। उपायुक्त कार्यालय कर्मचारी संघ ने इस मांग को तर्कहीन और अनुचित करार देते हुए कहा कि अब तक किसी भी सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया है। संघ का आरोप है कि बलवान कमेटी ने इस संवेदनशील मुद्दे पर बिना उनसे चर्चा किए सरकार को रिपोर्ट सौंप दी, जबकि उन्होंने 23 अगस्त 2024 को मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व), निदेशक भू-अभिलेख और समिति के अध्यक्ष से बैठक की मांग की थी। इसके बावजूद उन्हें इस विषय पर कोई अवसर नहीं दिया गया।
संघ ने स्पष्ट किया कि दो स्तरीय पदोन्नति प्रणाली न केवल राजस्व विभाग बल्कि हिमाचल प्रदेश सरकार के अन्य विभागों जैसे कि सचिवालय प्रशासन, महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय एवं कल्याण, शहरी विकास, सूचना एवं जनसंपर्क, परिवहन, सहकारिता, आबकारी एवं कराधान, उद्योग, पंचायती राज, श्रम एवं रोजगार, खाद्य नागरिक आपूर्ति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन, स्थानीय लेखा परीक्षा और शिक्षा विभाग में भी लागू है। पटवारी कानूनगो संघ का यह दावा कि यह व्यवस्था केवल राजस्व विभाग में है, पूरी तरह से आधारहीन है। बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री से कई बार मुलाकात कर यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि उनके लिए निर्धारित कोटे में कोई बदलाव न हो। मुख्यमंत्री ने भी उन्हें पूरा आश्वासन दिया है कि उनके अधिकारों से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। इसके बावजूद, संघ का कहना है कि यदि सरकार इस कोटे में किसी भी प्रकार का संशोधन करती है, तो उन्हें मजबूरन आंदोलन का सहारा लेना पड़ेगा।