बिलासपुर के ओएसटी केंद्र में 22 मरीजों को चल रहा इलाज
नशा छोड़ सामान्य जीवन की ओर अग्रसर हो रहे रहे युवा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। प्रदेश सरकार चिट्टा और अन्य नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान चला रही है। जिला बिलासपुर में नशा ग्रस्त युवाओं के उपचार और पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी के तहत क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर का ओपिओइड सब्सटीट्यूशन थेरेपी (ओएसटी) केंद्र ऐसे लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। वर्तमान में यहां 22 मरीज नियमित उपचार ले रहे हैं। सभी मरीजों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। उपायुक्त राहुल कुमार ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने नशा ग्रस्त युवाओं के परिजनों से झिझक छोड़कर ओएसटी केंद्र की सेवाएं लेने की अपील की।
ओएसटी कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक और सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराना है। यह उपचार इंजेक्शन से नशा करने की प्रवृत्ति कम करता है। इससे एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी व हेपेटाइटिस-सी जैसे संक्रमणों का खतरा भी घटता है। क्षेत्रीय अस्पताल में प्रशिक्षित काउंसलर, मनोचिकित्सक और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से रेफरल नेटवर्क भी तैयार किया गया है। उपायुक्त ने परिजनों से केंद्र की सेवाएं लेने की अपील की है।
ओएसटी उपचार प्रक्रिया
ओएसटी के तहत मरीजों को ब्यूप्रेनॉरफिन दवा दी जाती है। यह दवा चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार दी जाती है। इसका असर 24 से 36 घंटे तक रहता है। इससे चिट्टा और अन्य ओपिओइड नशे की इच्छा में कमी आती है। दवा की मात्रा मनोचिकित्सक मरीज की स्थिति के अनुसार तय करते हैं।
समग्र पुनर्वास और सफलता
यह केवल दवा आधारित उपचार नहीं, बल्कि समग्र पुनर्वास प्रणाली है। इसमें काउंसिलिंग, मनोवैज्ञानिक सहयोग, चिकित्सकीय निगरानी और परिवार का सहयोग शामिल है। इससे मरीजों की कार्यक्षमता बढ़ती है और पारिवारिक रिश्ते मजबूत होते हैं। वे सामान्य सामाजिक जीवन में लौटने लगते हैं। उपचार की सफलता के लिए प्रतिदिन दवा लेना और सप्ताह में एक बार मनोचिकित्सक से परामर्श जरूरी है।