बैरी-रजादियां पंचायत में बैरी चौक से डेढ़ किलोमीटर भीतर मानर गांव में संती नाला से लेकर नाउ नाला तक सड़क का निर्माण कर डाला गया है। जिस जगह पर सड़क निर्माण हुआ है, वह सरकारी जमीन है।
यहीं नहीं सड़क निर्माण के लिए दर्जनों पेड़ों पर भी बिना अनुमति के लिए कुल्हाड़ी चला दी गई है। लेकिन इस पूरे प्रकरण की प्रशासन को कानों कान कोई खबर नहीं है। पंचायत का कहना है कि सड़क निर्माण कार्य उन्होंने नहीं करवाया है। ऐसे में सवाल उठता है कि सरकारी भूमि पर सड़क कौन बना रहा है और किसकी मंजूरी से पेड़ काटे गए हैं?
सरकारी नाले के साथ लगती जमीन के मालिक रोशन लाल निवासी मानर, देवी राम, जगदीश, सुरेंद्र, सुशील ,नंद लाल, मस्त राम, बाबू राम, राम पाल और सुरेंद्रपाल आदि का कहना है कि वन विभाग के दो कर्मचारियों के मौके पर आने के बाद भी काटे गए पेड़ों के मामले पर पर कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। लोगों ने आरोप लगाया कि वन विभाग के कर्मचारी 2 जुलाई को मौके पर आए थे और कटे हुए पेड़ों को मौके पर पाकर भी उन्होंने इसके खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाया।
देवी राम ने बताया कि है की तीन जुलाई को काटे हुए पेड़ों को ट्रक में डालकर मौके से गायब कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस मामले में वन विभाग दोषियों का पूरा सहयोग दे रहा है जिसके चलते खुलेआम बड़ी संख्या में हरे पेड़ों को काटा जा रहा है।
सरकारी नाले के साथ लगती जमीन मालिकों का कहना है की सड़क निर्माण करवाने वाले लोगों की मनमानी की वजह से साथ उनकी जमीन को भी भारी नुकसान हो रहा है।
बाबूराम, रामपाल और सुरेंद्र आदि ने जमीन में बाड़बंदी की थी, जिसे सड़क का निर्माण करते समय उखाड़ दिया गया है। पंचायत प्रधान राजीव चंदेल का कहना है कि सड़क निर्माण में पंचायत की कोई भूमिका नहीं है।