अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। बिलासपुर के बहुचर्चित ज्योति मौत मामले को एक साल से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी अभी तक पुलिस के पास फोरेंसिक रिपोर्ट नहीं पहुंची है। ज्योति के पिता रामचंद का कहना है कि उन्हें ऐसा लग रहा है कि पुलिस इस मामले में कुछ भी नहीं कर रही है। ज्योति बिलासपुर अस्पताल में फिजियोथैरेपिस्ट के तौर पर कार्यरत थीं।
ज्योति के पिता रामचंद का कहना है कि पांच सितंबर 2017 की रात को यह हादसा हुआ था, उन्हें छह सितंबर 2017 को दोपहर 12 बजे के करीब फोन आया था कि उनकी बेटी ने सुसाइड कर लिया है। ऐसे कई सवाल हैं जो उन्हें यह सोचने पर विवश करते हैं कि इस मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
उनका कहना है कि वारदात वाले दिन जब पुलिस ज्योति के कमरे में गई तो वहां पर उन्हें कुछ नहीं मिला, लेकिन जब फोरेंसिक टीम पहुंची तो कमरे के अंदर लैपटॉप सहित मोबाइल फोन व बिल तथा डायरी मिली थी। इसके अलावा ज्योति का पोस्टमार्टम भी देर रात को किया गया था। जबकि परिजनों को पोस्टमार्टम करवाने के लिए मना कर दिया था। पिता का कहना है कि पुलिस हर बार कोई न कोई नया बहाना लगाकर उन्हें भटका रही है।
वहीं पिता का कहना है कि फोरेंसिक जांच के लिए ज्योति के कमरे से मिले लैपटॉप, तीन मोबाइल फोन व शराब की बोतल मंडी भेजी थी उन्हें जून माह बाद जुन्गा क्यों भेज दिया है। ऐसे में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल पैदा होता है। पिता का आरोप है कि पुलिस मामले को दबाने का प्रयास कर रही है। जबकि कोर्ट ने भी 12 जनवरी 2018 को एसपी बिलासपुर को दोबारा से केस की जांच के निर्देश दिए थे लेकिन आजतक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
उधर एसपी बिलासपुर अशोक कुमार का कहना है कि डीएसपी रैंक का अधिकारी जांच कर रहा है। रिपोर्ट में देरी को लेकर एफएसएल ही बता पाएगी, पुलिस रिपोर्ट आने का इंतजार कर रही है। पुलिस मामले की जांच पूरी कर चुकी है, अब केवल एफएसएल रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है।
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क्यों आ रहा बार-बार डॉक्टर का नाम
इस मामले में हर बार एक डॉक्टर का नाम सामने आ रहा है, जो ज्योति के परिजनों को परेशान कर रहा है। इसके अलावा मामले को गठित एसआईटी टीम ने भी ज्योति के परिजनों को घर जाकर केस बंद करने को कहा था। जबकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक साल बाद भी फोरेंसिक रिपोर्ट क्यों नहीं आई है।
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