शाहतलाई (बिलासपुर)। वन परिक्षेत्र झंडूता में कोरोना वायरस से निपटने के लिए लगे कर्फ्यू में भी वन माफिया हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। कर्फ्यूू का फायदा उठाते हुए वन माफिया और सक्रिय हो गया है। जंगलों से खैर की लकड़ी तस्करी करने का एक मामला वन परिक्षेत्र झंडूता के गोचर बीट के जंगल क्थ्यून में आया है। वहां पर वन काटुओं ने लगभग 4 लाख रुपये की कीमत के खैर के पेड़ अवैध रूप से काटे। वन अधिकारी ने इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज करवा दी है।
मिली जानकारी के अनुसार गोचर बीट का वन रक्षक शनिवार को अपने जंगल की गश्त पर था, तो उसे जंगल में खैर की कटी हुई टहनियां दिखाई दीं। इस पर वन रक्षक को शक हुआ कि कहीं किसी ने खैर के पेड़ों पर कुल्हाड़ी न चला दी हों। वन रक्षक ने देखा कि जंगल में चारों तरफ कटे हुए खैर के पेड़ों की जड़ें दिखाई दे रहीं थीं। वन रक्षक ने वन खंड अधिकारी को इस बारे में सूचित किया। वन खंड अधिकारी तुरंत अपने स्टाफ सहित मौके पर पहुंचे। जहां उन्होंने देखा कि जंगल से 16 खैर के पेड़ कटे हुए थे जिनकी कीमत करीब चार लाख रुपये आंकी गई है।
वन काटू खैर की सभी लकड़ी को लेकर फरार हो गए हैं। इस दौरान वन खंड अधिकारी ने उच्चाधिकारियों को मामले की जानकारी दी। उधर झंडूता के वन परिक्षेत्र अधिकारी अशोक कुमार ने दूरभाष के माध्यम से तलाई पुलिस थाने में गोचर वन बीट से कटे हुए 16 खैर के पेड़ों जिसकी कीमत चार लाख रुपये है कि शिकायत दर्ज करवाई। तलाई पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। उधर वन विभाग खैर के पेड़ों की लकड़ी को ढूंढने के लिए जंगल को छानने में लगा है तथा हर संभव जगहों पर छापे मारे जा रहे हैं।
घुमारवीं के डीएसपी राजेन्द्र जसवाल ने बताया कि झंडूता के वन परिक्षेत्र अधिकारी ने दूरभाष पर क्थ्यून जंगल से 16 खैर के पेड़ काटने की शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस ने नामालूम व्यक्तियों के खिलाफ 32, 33 आईएफ एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत करके छानबीन शुरू कर दी है।