बिलासपुर। कीरतपुर नेरचौक फोरलेन के निर्माण के दौरान एक और फर्जीबाड़ा सामने आया है। पहले तो एनएचएआई ने बिना मंजूरी रोड अलाइनमेंट प्लान बदल डाला। इसके बाद नए प्लान के लिए पर्यावरण मंत्रालय से इस कार्य को करने के लिए मंजूरी तक भी नहीं ली गई है। इसका खुलासा प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, वन विभाग और एनएचएआई के कार्यालय से जारी की गई सूचनाओं से हुआ है। खबर की पुष्टि एनएचएआई/पीडी/पीआईयू/मंडी/आरटीरआई/18/2065 18अक्तूबर 2019 से हुई है।
रोड अलाइनमेंट बदलाव का खुलासा होने के बाद फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने पर्यावरण मंत्रालय, वन विभाग और एचएचएआई से सूचना मांगी थी कि जो रोड अलाइनमेंट प्लान बदला गया है क्या उसके लिए पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी ली गई थी? इस पर एनएचएआई के परियोजना निदेशक एनवायरनमेंट क्लियरेंस के अनापत्ति प्रमाण पत्र देने की जगह भूमि अधिग्रहण प्लान सूचना के तहत थमा दिया।
जबकि वन विभाग ने कहा कि सूचना उनके कार्यालय में मौजूद नहीं है। जबकि नियम अनुसार यह पूरी जानकारी वन विभाग के पास होना अनिवार्य थी क्योंकि वन विभाग पूरे फोरलेन निर्माण की देखरेख कर रहा है।
इस रूट की एनवायरमेंट क्लियरेंस के बारे में जब फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने जलवायु परिवर्तन मंत्रालय देहरादून से आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी कि बदले गए इस रूट की एनवायरनमेंट क्लियरेंस की छाया-प्रतियां उपलब्ध करवाई जाएं। इस पर मंत्रालय ने यह जानकारी राज्य सरकार तथा राज्य सरकार ने मुख्य अरण्यपाल शिमला व मुख्य अरण्यपाल वन शिमला ने अरण्यपाल बिलासपुर व बिलासपुर अरण्यपाल ने जिला वन अधिकारी को देने बारे में कहा। जिला वन अधिकारी ने यह जानकारी पर्यावरण अभियंता बिलासपुर को उपलब्ध करवाने के लिए स्थानांतरित करते हुए और पर्यावरण अभियंता ने यह जानकारी एनएचएआई जिला मंडी के परियोजना निदेशक को उपलब्ध करवाने बारे कहा। इस पर उन्होंने यह जानकारी दी है कि भूमि अधिग्रहण प्लान जिला बिलासपुर के कार्यालय में उपलब्ध है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक की ओर से दी गई इस गैर जिम्मेदाराना सूचना से इस विषय की पुष्टि हुई कि उपरोक्त विभागों के इन अधिकारियों के पास बदले गए इस रूट की कोई एनवायरनमेंट क्लियरेंस ही नहीं है।
उपायुक्त बिलासपुर से समिति के उपप्रधान अशोक कुमार, चिंता देवी, राकेश कुमार, कोषाध्यक्ष सरवन कुमार, भगत राम, मुख्य सलाहकार लेखराम, रामपाल, सदस्य सीता राम, बलदेव शर्मा, जगत राम, जगदीश राम आदि ने इस संबंध में कार्रवाई की मांग की।