बिलासपुर। जिले के जुखाला में चल रहे नैना स्टोन क्रशर संचालक के खिलाफ विजिलेंस बिलासपुर ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर क्रशर चलाने के मामले में एफआईआर दर्ज की है। संचालक पर आरोप है कि उसने विभिन्न प्रकार के दस्तावेज गलत तरीके से बनाए हैं जो विजिलेंस की छानबीन में सही पाए गए हैं। इसके बाद विजिलेंस ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज की है।
मिली जानकारी के अनुसार जुखाला में चल रहे स्टोन क्रशर की क्षेत्र के लोगों ने विजिलेंस में शिकायत की थी। कहा गया था कि जो स्टोन क्रशर चल रहा है वह नियमों को ताक पर रख कर चल रहा है। इसके संचालन के लिए अधिकांश एनओसी फर्जी है। यहां तक कि क्षेत्र और पंचायत आदि से मिलने वाली एनओसी फर्जी है जिसके बारे में व्यक्ति ने विजिलेंस बिलासपुर में शिकायत दी थी।
शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने इस संबंध में गहन छानबीन की। विजिलेंस ने जांच में पाया की शिकायत कर्ता द्वारा लगाए गए आरोप सही है। विजिलेंस ने जांच में पाया कि विभिन्न प्रकार की एनओसी जो क्रशर संचालन के लिए पेश की गई हैं वह फर्जी व गलत तरीके से ली गई हैं। इसके बाद विजिलेंस ने पूरे साक्ष्य जुटाने के बाद इस संबंध में एफआईआर दर्ज कर ली है। विजिलेंस इस मामले में अब जल्द ही गिरफ्तारियां भी कर सकती हैं।
डीएसपी विजिलेंस संजीव कुमार ने बताया कि इस संबंध में विजिलेंस के पास शिकायत आई थी। इसके बाद जब पूरे मामले की छानबीन की गई तो शिकायत में लगाए गए सभी आरोपी सही पाए गए। विजिलेंस ने पूरे साक्ष्य जुटाने के बाद इस संबंध में एफआईआर दर्ज कर ली है। कहा कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।
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क्रशर की मंजूरी देने वाला विभाग भी संदेह के घेरे में
जुखाला में स्टोन क्रशर चलाने की मंजूरी देने वाला विभाग भी संदेह के घेरे में है। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि दोनों विभाग ने क्या कभी दस्तावेज की जांच नहीं की। कैसे दस्तावेजों की जांच के बगैर ही स्टोन क्रशर चलाने की अनुमति दी गई यह बड़ा सवाल बना हुआ है।