अदालत से सबूत नहीं तो गाड़ी नहीं
मालिकाना हक साबित करने में नाकाम रहा आवेदक, एनडीपीएस मामले में हुई थी कार्रवाई
बिलासपुर कोर्ट के विशेष न्यायाधीश-द्वितीय की अदालत ने सुनाया आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नशीले पदार्थों की तस्करी के मामले में पकड़ी गई गाड़ियों को लेकर विशेष अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। बिलासपुर कोर्ट के विशेष न्यायाधीश-द्वितीय की अदालत ने कुल्लू के एक व्यक्ति द्वारा अपनी स्विफ्ट डिजायर कार को रिहा करवाने के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक वाहन का मालिकाना हक संदेह से परे न हो, तब तक इसे किसी के सुपुर्द नहीं किया जा सकता।
पुलिस थाना घुमारवीं ने 31 जनवरी 2026 को चरस तस्करी के एक मामले में कार को कब्जे में लिया था। आवेदक दौलत राम, निवासी बंजार (कुल्लू) ने कोर्ट में अर्जी देकर गाड़ी, उसके दस्तावेज और चाबियां वापस मांगी थीं। आवेदक का तर्क था कि वह गाड़ी का पंजीकृत मालिक है और अब जांच के लिए वाहन की जरूरत नहीं है। राज्य की ओर से पैरवी करते हुए सरकारी वकील अभय गुप्ता ने इस मांग का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि आवेदक ने गाड़ी के मालिकाना हक या ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित कोई भी पुख्ता दस्तावेज पुलिस को नहीं दिए हैं। ऐसे में यह पहचान पाना मुश्किल है कि असली मालिक कौन है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि बिना सत्यापन के वाहन किसी अनजान व्यक्ति को सौंपने से उसके बेचे जाने या दोबारा नशे के अवैध धंधे में इस्तेमाल होने का खतरा रहता है। इस आवेदन में आवेदक का कोई कानूनी अधिकार साबित नहीं हुआ।