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Bilaspur News: अदालत के आदेश की अवहेलना पर कड़ा रुख, निचली अदालत के आदेश बरकरार

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एडीजे कोर्ट घुमारवीं ने भूमि विवाद में हस्तक्षेप की अपीलें कीं खारिज
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कहा-राजस्व रिकॉर्ड में जो पक्ष मालिक, काबिज दर्ज, उसके हक सुरक्षित रखना प्राथमिकता

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने क्षेत्र के भूमि विवाद मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने विवादित भूमि पर हस्तक्षेप और निर्माण संबंधी दो अलग-अलग अपीलों को खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राजस्व रिकॉर्ड में जो पक्ष मालिक और काबिज दर्ज है, उसके अधिकारों की रक्षा करना कानूनी प्राथमिकता है।
अदालत ने अपने निर्णय में रेखांकित किया कि हिमाचल प्रदेश भू-राजस्व अधिनियम के तहत राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज प्रविष्टियों की एक धारणात्मक मूल्य होती है। जब तक इन प्रविष्टियों को सक्षम साक्ष्यों के माध्यम से गलत साबित न कर दिया जाए, तब तक इन्हें ही वैध माना जाता है। मामले के अनुसार, संबंधित 4-0 बीघा भूमि खसरा नंबर 469/356/217 पर मुख्य वादी का मालिकाना हक और कब्जा रिकॉर्ड में दर्ज है। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि राजस्व विभाग की ओर से की गई आधिकारिक निशानदेही में सीमाएं स्पष्ट हो चुकी हैं। प्रतिवादी पक्ष ने दलील दी थी कि वर्ष 2021 के एक समझौते के तहत मौके पर कब्जे की स्थिति को बदला नहीं जाना चाहिए था और इंतकाल गलत तरीके से किया गया है। हालांकि, अदालत ने पाया कि प्रतिवादी की ओर से उक्त इंतकाल के खिलाफ कलेक्टर कोर्ट में दायर अपील पहले ही खारिज हो चुकी है। एडीजे कोर्ट ने कहा कि जब तक उच्च राजस्व अधिकारी की ओर से इंतकाल रद्द नहीं किया जाता, तब तक उसे कानूनी रूप से सही माना जाएगा।
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अदालत ने माना कि यदि इस चरण पर प्रतिवादी पक्ष को विवादित भूमि पर निर्माण या हस्तक्षेप की अनुमति दी जाती है, तो इससे भूमि की प्रकृति बदल जाएगी। ऐसी स्थिति में मुख्य वादी को अपूरणीय क्षति होगी, जिसकी भरपाई भविष्य में संभव नहीं होगी। अदालत ने निचली अदालत (सिविल जज कोर्ट नंबर-2) के 18 नवंबर 2025 के उस आदेश को पूरी तरह सही ठहराया, जिसमें प्रतिवादियों को हस्तक्षेप से रोका गया था। अब दोनों पक्षों को आगामी 18 अप्रैल 2026 को निचली अदालत में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। न्यायालय ने यह भी साफ किया कि ये टिप्पणियां केवल अपीलों के निपटारे के लिए हैं और मुख्य मुकदमे के अंतिम फैसले पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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