घुमारवीं कोर्ट ने थाना प्रभारी को मौके पर आदेश की अनुपालना सुनिश्चित करवाने को कहा
जरूरत पड़ने पर राजस्व अधिकारी की मदद से विवादित भूमि की पहचान होगी
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। जमीन विवाद से जुड़े मामले में यथास्थिति के आदेश के बावजूद पहली मंजिल का निर्माण शुरू करने के मामले में सिविल जज कोर्ट नंबर-3 घुमारवीं ने पुलिस सहायता के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने घुमारवीं थाना प्रभारी को 31 मार्च 2026 को पारित आदेश की मौके पर अनुपालना सुनिश्चित करवाने को कहा है। जरूरत पड़ने पर पुलिस राजस्व विभाग के अधिकारी की सहायता लेकर विवादित भूमि की पहचान भी करवा सकेगी।
मामला स्थायी निषेधाज्ञा के मुख्य वाद से जुड़ा है। कोर्ट ने 31 मार्च को दोनों पक्षों को मुकदमे की भूमि की प्रकृति, निर्माण और कब्जे के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। हालांकि, पहले से बने ढांचे पर लेंटर डालने की अनुमति प्रतिवादी पक्ष को दी गई थी। आवेदक ने कोर्ट में दायर आवेदन में आरोप लगाया कि यथास्थिति के आदेश के बावजूद प्रतिवादी पक्ष ने पहली मंजिल का निर्माण शुरू कर पिलर खड़े कर दिए। मकान और गोशाला की ओर ओवरहैंगिंग छज्जा बनाने की तैयारी किए जाने का आरोप भी लगाया गया। इसके आधार पर आदेश की अनुपालना के लिए पुलिस सहायता मांगी गई। प्रतिवादी पक्ष ने आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि कोर्ट ने पहले से बने ढांचे पर लेंटर डालने की अनुमति दी थी। आवेदन को गैर-जरूरी बताते हुए अन्य आरोपों से भी इन्कार किया गया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड देखने के बाद कोर्ट ने पाया कि आवेदक के आरोपों को तस्वीरों और शपथपत्र से समर्थन मिला है। तस्वीरों में पहले पिलर खड़े किए जाने और उसके बाद ढांचा तैयार किए जाने की स्थिति सामने आई। पुलिस रिपोर्ट में भी भूतल का निर्माण और लेंटर डालने का काम पूरा होने तथा पहली मंजिल के ढांचे के लिए मजदूरों के काम करने की बात सामने आई।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 31 मार्च के आदेश में प्रतिवादी पक्ष को केवल पहले से बने ढांचे पर लेंटर डालने की अनुमति दी गई थी। पहली मंजिल का नया निर्माण यथास्थिति के आदेश के दायरे में नहीं आता। कोर्ट ने कहा कि अपने आदेश को मौके पर अक्षरश: लागू करवाना न्यायालय का दायित्व है। इसके बाद आवेदन मंजूर करते हुए घुमारवीं थाना प्रभारी को आदेश की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए पुलिस सहायता उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए।