भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने एनएचएआई से मांगी जांच रिपोर्ट
मुआवजा लेने के बाद दोबारा बेचने की भी शिकायत
कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना में मुआवजा वितरण पर गंभीर सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना के तहत भूमि और मकानों के अधिग्रहण तथा मुआवजा वितरण प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं की शिकायत सामने आई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष भू-अर्जन अधिकारी (एलएओ) बिलासपुर ने एनएचएआई की परियोजना कार्यान्वयन इकाई मंडी के परियोजना निदेशक को पत्र जारी कर शिकायत की जांच कर बिंदुवार रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं।
शिकायत के अनुसार कुछ मामलों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी किए बिना ही मकानों का मुआवजा जारी कर दिया गया। आरोप है कि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी किए बिना भुगतान करना नियमों के विपरीत है। इससे पूरी मुआवजा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। शिकायत में यह भी कहा है कि मुआवजा देने के बाद संबंधित मकानों को पूरी तरह ध्वस्त नहीं किया गया, बल्कि केवल आंशिक रूप से गिराया गया।
इससे न केवल परियोजना के कार्य में बाधा उत्पन्न हुई, बल्कि भविष्य में भूमि के दुरुपयोग की आशंका भी बनी हुई है। सबसे गंभीर आरोप ये हैं कि जिन मकानों या भूमि का मुआवजा दिया गया, उसी स्थान पर कथित तौर पर जमीन बेचकर दोबारा निर्माण कार्य किया जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन और मुआवजा राशि के दुरुपयोग का मामला बन सकता है।
विशेष भू-अर्जन अधिकारी बिलासपुर ने एनएचएआई के परियोजना निदेशक को लिखे पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिकायत में उठाए सभी बिंदुओं पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए और जांच के बाद विस्तृत बिंदुवार रिपोर्ट शीघ्र कार्यालय को भेजी जाए। मामले के सामने आने के बाद फोरलेन परियोजना में मुआवजा वितरण और अधिग्रहण प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। पत्र की प्रतिलिपि उपायुक्त बिलासपुर और शिकायतकर्ता को भी सूचना के लिए भेजी गई है। इससे स्पष्ट है कि जिला प्रशासन भी इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि जब भूमि अधिग्रहण और मकानों से संबंधित पूरी प्रक्रिया भूमि अधिग्रहण इकाई बिलासपुर के राजस्व कर्मियों की ओर से की गई है, तो ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि एनएचएआई से रिपोर्ट किस आधार पर मांगी जा रही है, जबकि सारा रिकॉर्ड विभाग के पास पहले से उपलब्ध है।