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आरडीजी बंद करना हिमाचल के साथ अन्याय: राजेश धर्माणी

Mon, 02 Feb 2026 11:11 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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पत्रकार वार्ता को संबोधित करते मंत्री राजेश धर्माणी। संवाद
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-1952 से लेकर 2025 तक मिलती रही ग्रांट
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-कहा, मरहम लगाने की जगह नमक छिड़कने का हुआ काम

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने केंद्रीय बजट को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बिलासपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि हाल ही में पेश किए गए यूनियन बजट में हिमाचल प्रदेश का गला घोंटने का काम किया गया है। वर्ष 1952 से लेकर 2025-26 तक राज्य को मिलती आ रही रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (आरडीजी) को पूरी तरह बंद कर दिया गया, जो सरासर अन्याय है।
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धर्माणी ने कहा कि 15वें वित्त आयोग के तहत पिछले पांच वर्षों में हिमाचल को करीब 50 हजार करोड़ रुपये मिले थे। राज्य सरकार ने पहले ही आपत्ति दर्ज कराते हुए 16वें वित्त आयोग में औसत के आधार पर फंड डेवोलुशन की मांग की थी। उम्मीद थी कि 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले 16वें वित्त आयोग के कार्यकाल में अगले वित्तीय वर्ष में कम से कम 10 हजार करोड़ रुपये मिलेंगे, लेकिन बजट में एक भी रुपया नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि हिमाचल छोटा राज्य है, लेकिन देश के लिए हमेशा कुर्बानियां दी हैं। भाखड़ा-ब्यास जैसी परियोजनाओं के कारण लोगों के घर और जमीनें डूबीं, जिससे देश में औद्योगिक और ऊर्जा क्रांति की नींव पड़ी। पर्यावरण संरक्षण में भी हिमाचल ने ग्रीन फेलिंग पर प्रतिबंध लगाकर उदाहरण पेश किया है। धर्माणी ने आपदाओं का जिक्र करते हुए कहा कि 2023 और 2025 में भारी बारिश से सैकड़ों लोगों की जान गई और हजारों करोड़ की संपत्ति नष्ट हुई। ऐसे में मरहम की जगह नमक छिड़कने का काम किया गया है। उन्होंने प्रदेश के सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों से भी जवाब मांगा। मंत्री ने मुख्यमंत्री से विशेष कैबिनेट बैठक या एक दिवसीय विधानसभा सत्र बुलाने का आग्रह किया है, ताकि आरडीजी बंद होने से पैदा होने वाले हालात पर चर्चा कर केंद्र तक हिमाचल की भावनाएं पहुंचाई जा सकें।
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