बिलासपुर। नगर परिषद बिलासपुर को 30 दुकानदारों ने पिछले 40 वर्षों से किराया नहीं दिया है। एक साल पहले नगर परिषद की ओर से किराया बढ़ाने के बाद कई दुकानदारों ने किराया देना बंद कर दिया है। आर्थिक तंगी में चल रही बिलासपुर नगर परिषद को लाखों का नुकसान झेलना पड़ रहा है। वहीं नगर परिषद तीन बार किराया लेने के संबंध में दुकानदारों को नोटिस जारी कर चुकी है। लेकिन अभी तक कोई भी दुकानदार किराया देने को तैयार नहीं है।
उल्लेखनीय है कि नगर परिषद बिलासपुर ने 40 साल पहले दुकानें किराये पर उपलब्ध करवाई थीं। लेकिन कई दुकानदार ऐसे हैं जिन्होंने कारोबार तो किया लेकिन नगर परिषद को किराया नहीं दिया। नगर परिषद ने कई बार नोटिस जारी किए, लेकिन इन दुकानदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। कुछ दुकानदार एक साल पहले तक किराया दे रहे थे। पहले इन दुकानों का किराया तीस से चालीस रुपये प्रति माह वसूला जाता था। लेकिन एक साल पहले किराए में बढ़ोतरी कर दी गई। इसके बाद इन दुकानदारों ने भी किराया देना बंद कर दिया।
बताते चलें कि नगर परिषद की दुकानों का किराया न के बराबर था। इसको देखते हुए कोर्ट ने किराए में बढ़ोतरी की। इस पर कुछ लोगों ने विरोध प्रकट किया था और उन्होंने किराया देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने 600 से 3000 रुपये तक किराया बढ़ाया है। कोर्ट ने किराया एरिया के हिसाब से बढ़ाया है। नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी अशोक शर्मा ने कहा कि किराया कोर्ट की ओर से बढ़ाया गया है। इसलिए नगर परिषद किराए को कम नहीं कर सकती। नगर परिषद की 154 दुकानों में से 30 ऐसी हैं जिनका आज दिन तक कोई किराया ही नहीं मिला है। कोर्ट रोड के साथ नगर परिषद की दुकानों में 10 लोग ऐसे हैं, जिन्होंने किराया नहीं दिया है। ईओ ने कहा कि इस साल नगर परिषद ने
तीन बार नोटिस जारी किए। लेकिन अभी तक किराए की भरपाई नहीं हो पाई है।
उन्होंने बताया कि कोर्ट रोड की दुकानों का किराया 1100 रुपये है। वहीं डियारा की दुकानों का किराया 800 रुपये है। रौड़ा सेक्टर की दुकानों का किराया 1100 रुपये है। नगर परिषद का कई दुकानदारों के साथ केस चला हुआ है और इनका किराया अब तक लाखों में है।