बाल विवाह निषेध अधिनियम की बारीकियों से रूबरू हुए जमीनी कार्यकर्ता
मुसीबत में फंसे बच्चों के लिए 1098 बन रहा है सुरक्षा कवच
स्पॉन्सरशिप और मिशन वात्सल्य से संवरेगा बेसहारा बच्चों का भविष्य।
मंत्रालय के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने आयोजित किया प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर की ओर से आशा एसओपी के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ, जिसमें चाइल्ड हेल्पलाइन बिलासपुर की टीम ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया।
कार्यक्रम का आयोजन नालसा योजना 2024 के अंतर्गत किया गया, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर कार्य कर रही आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बाल अधिकारों, बाल विवाह की रोकथाम तथा कानूनी प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान करना रहा। प्रशिक्षण सत्र में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर प्रतीक गुप्ता ने आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बाल विवाह निषेध अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी दी। बताया कि बाल विवाह न केवल एक सामाजिक बुराई है, बल्कि यह कानूनन अपराध भी है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को बाल विवाह की पहचान, रिपोर्टिंग प्रक्रिया, कानूनी दायित्व तथा पीड़ित बच्चों को संरक्षण देने से जुड़े पहलुओं को सरल भाषा में समझाया। इस अवसर पर जिला बाल संरक्षण इकाई बिलासपुर से जिला बाल संरक्षण अधिकारी सत्य चंदेल ने चल रहीं विभिन्न सरकारी योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पॉन्सरशिप योजना, स्पेशल एडॉप्शन एजेंसी, दत्तक ग्रहण प्रक्रिया, चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशंस, वन स्टॉप सेंटर सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि संकटग्रस्त बच्चों और महिलाओं को इन योजनाओं से किस प्रकार लाभ पहुंचाया जा सकता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में चाइल्ड हेल्पलाइन बिलासपुर की ओर से चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की कार्यप्रणाली विषय पर विशेष व्याख्यान दिया गया। इस दौरान बताया गया कि किसी भी प्रकार के बाल शोषण, बाल विवाह, बाल श्रम, गुमशुदगी या संकट की स्थिति में 1098 पर सूचना मिलने के बाद किस प्रकार त्वरित रेस्क्यू,काउंसलिंग और पुनर्वास की प्रक्रिया अपनाई जाती है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समाज की पहली कड़ी हैं, जो समय रहते बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं को रोकने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें कानूनी ज्ञान और व्यावहारिक जानकारी देकर सशक्त बनाने का प्रयास किया गया।