छत्तीसगढ़ की सड़कों पर आवारा पशुओं के घूमने को लेकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। कहा कि कई सालों से कानून बने हैं, लेकिन उन्हें अब तक लागू नहीं किया गया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति बनाने का निर्देश दिया है। इस समिति में केंद्र और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अफसर भी शामिल रहेंगे। सड़कों पर आवारा पशुओं के विचरण से लगातार हो रहे हादसों को लेकर दायर जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई।
कोर्ट ने कहा-पीआईएल लगने के बाद कार्रवाई कर रहे
एनएचएआई के वकील धीरज वानखेड़े ने राजमार्ग संबंधी कई रूल्स और एक्ट डिवीजन बेंच में प्रस्तुत किए और बताया कि कई सालों से यह बने हुए हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि, इन कानूनों को अब तक लागू नहीं किया गया है। राज्य शासन के वकील ने हाईकोर्ट के पूछने पर बताया कि आवारा मवेशियों को नगर निगम पकड़ रहा है। कोर्ट ने कहा कि पीआईएल लगाने के बाद आप लोग यह सब कर रहे हैं। इसके बाद कोर्ट ने मुख्य सचिव और डायरेक्टर एनएचएआई से विमर्श कर कमेटी बनाने के निर्देश दिए।
मामले की अगली सुनवाई चार सितंबर को
कोर्ट ने समिति के तहत क्या काम किए जाएंगे, कौन कौन क्या जवाबदारी लेंगे, यह सब विस्तार से रिपोर्ट में बताने के निर्देश दिए हैं। यह कमेटी इस समस्या के समाधान के लिए कार्रवाई करने के बाद इस संबंध में एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इस रिपोर्ट पर चार सितंबर को मामले की अगली सुनवाई की जाएगी। राजेश चिकारा व संजय रजक की जनहित याचिका पर कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इसमे मुख्य मार्गों और शहर की सड़कों पर पशुओं को खुला छोड़ने से हो रही दुर्घटनाओं की जानकारी देते हुए कार्रवाई की मांग की गई है।