दोष सिद्धि और सजा के आदेश को रद्द कर आरोपी को किया बरी
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। राष्ट्रीय लोक अदालत में चेक बाउंस के एक महत्वपूर्ण मामले का आपसी समझौते के आधार पर निपटारा कर दिया गया। लोक अदालत की पीठ ने अपील को स्वीकार करते हुए पूर्व में सुनाई गई दोष सिद्धि और सजा के आदेश को रद्द कर आरोपी को बरी कर दिया।
यह अपील अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, घुमारवीं द्वारा वर्ष 2023 में सुनाए गए दोष सिद्धि के फैसले और सजा आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। लोक अदालत में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच समझौते के प्रयास किए गए, जो सफल रहे। इसके बाद दोनों पक्षों ने स्वेच्छा से विवाद समाप्त करने पर सहमति जताई। मामले में शिकायतकर्ता की ओर से लिखित नो ऑब्जेक्शन प्रस्तुत किया गया। इसके आधार पर अदालत ने पाया कि दोनों पक्षों के बीच हुआ समझौता वैधानिक और स्वैच्छिक है। अदालत ने कहा कि यह समझौता किसी दबाव में नहीं बल्कि आपसी सहमति से किया गया है। पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत आने वाले मामलों का निपटारा किसी भी स्तर पर आपसी समझौते के माध्यम से किया जा सकता है। इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों का भी उल्लेख किया गया। आमतौर पर ऐसे मामलों में अपीलीय स्तर पर समझौता होने पर चेक राशि का 15 प्रतिशत बतौर लागत जमा करना होता है, लेकिन इस मामले में परिस्थितियों और पक्षों के सकारात्मक रुख को देखते हुए अदालत ने इस राशि को माफ कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि समझौते से न केवल विवाद का अंत होता है, बल्कि इससे पक्षों के बीच संबंध भी बेहतर होते हैं और समाज में शांति व सौहार्द को बढ़ावा मिलता है। लोक अदालत ने अपील को मंजूर करते हुए निचली अदालत द्वारा पारित दोषसिद्धि और सजा के आदेशों को निरस्त कर दिया और आरोपी को आरोपों से बरी कर दिया। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने मामले की फाइल को रिकॉर्ड रूम में भेजने और निचली अदालत के रिकॉर्ड को वापस करने के निर्देश भी जारी किए।