घुमारवीं में चैहड़ दंगल अखाड़ा। संवाद
-2011 से शुरू हुआ था दंगल, इस बार 13वीं बार होगा आयोजन
-दंगल में इस बार मराठा पहलवान दिखाएंगे दमखम
नीरज महाजन
भराड़ी (बिलासपुर)। उपमंडल घुमारवीं के तहत चैहड़ में होने वाले भारत केसरी दंगल ने 15 साल में अपनी विशेष पहचान बनाई है। यही कारण है कि देश भर के नामी पहलवान इस दंगल में दमखम दिखाने पहुंचते हैं। इस बार 18 अप्रैल को 13वीं बार इस दंगल का आयोजन होने जा रहा है, जिसमें विशेष रूप से मराठा पहलवान दमखम दिखाएंगे।
चैहड़ में 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने भारत केसरी दंगल का शुभारंभ किया था। उसके बाद चैहड़ दंगल कमेटी ने इस दंगल को बेहतर बनाने के हर संभव प्रयास किए, जिस कारण आज यह दंगल भारत के प्रमुख दंगलों में शुमार है। कोरोना के कारण दो बार यह दंगल आयोजित नहीं हुआ था। इस दंगल की तैयारी एक माह पहले से शुरू हो जाती है। इस बार दंगल में मराठा पहलवानों के साथ पंजाब के नामी पहलवान भिड़ेंगे। चित और पट की कुश्तियों में लाखों रुपये का इनाम बांटा जाएगा। इनाम के साथ-साथ भारत केसरी का खिताब भी विजेता पहलवान को दिया जाएगा। दंगल के लिए पहली बार महाराष्ट्र के छह नामी मराठा पहलवानों को निमंत्रण दिया गया है। ये पहलवान अब तक कई बड़े खिताब जीत चुके हैं और देश के दिग्गज पहलवानों को मात दे चुके हैं। इसके अलावा हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के शीर्ष पहलवान भी दंगल में दमखम दिखाएंगे, जिससे दंगल में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी। यह पहला मौका होगा जब इतने बड़े स्तर पर मराठा पहलवान हिमाचल प्रदेश की धरती पर कुश्ती करेंगे। पिछले साल 21 वर्षीय मराठा पहलवान पृथ्वीराज मौहोल ने इस अखाड़े में दम दिखाया था। कमेटी प्रधान जोगिंदर जोगी, उप प्रधान दिनेश (लक्की), सचिव कमल ठाकुर और अखाड़ा के इंचार्ज परशुराम, जगदीश पहलवान सहित अन्य पदाधिकारी तैयारियों में जुटे हैं। दंगल की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि कौन सा मराठा पहलवान किस राज्य के पहलवान से भिड़ेगा, यह कुश्ती से कुछ मिनट पहले तय किया जाएगा। इससे मुकाबले रोमांचक और अप्रत्याशित रहेंगे। भारत के उच्च कोटि के पहलवानों में शुमार बालू बोडके भी इस बार दंगल में शिरकत करेंगे।