संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। प्राथमिक स्कूल बच्चों के भविष्य की नींव रखते हैं लेकिन जिले में हालात यह है कि इन्हीं स्कूलों में लंबे अरसे से शिक्षकों के पद खाली हैं। शिक्षा देने के लिए सरकार मात्र औपचारिकता पूरी की जा रही है।
ऐसा ही मामला सदर विधानसभा क्षेत्र की डोभा पंचायत में सामने आया है। इस पंचायत के दो प्राथमिक स्कूल मात्र 1-1 शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि प्राथमिक स्कूल सायर पांच प्राथमिक स्कूलों का सेंटर है।
यहां की सेंटर मुख्य अध्यापक के पास पांच स्कूलों की कागजी प्रक्रिया और गतिविधियों का जिम्मा भी है। इसके साथ ही पिछले करीब दो साल से अध्यापक पांच कक्षाओं की पढ़ाई का जिम्मा उठा रही हैं। इससे न ही बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पा रही है और न ही मुख्याध्यापिका अपने अन्य कार्य के लिए समय दे पाती हैं।
अध्यापिका अंबिका का कहना है कि स्कूल में दो साल पहले एक पद खाली हुआ था। वहीं छह माह पहले दूसरा पद शिक्षक का खाली है। अभी तक दोनों ही पदों पर कोई नियुक्ति नहीं हुई है।
अंबिका को पांच कक्षाओं के सारे विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं। तीन बजे तक पांच कक्षाएं लगातार पढ़ाने के बाद सेंटर स्कूल का कार्यभार निभाने के लिए अतिरिक्त समय देना पड़ता है।
अब काम करना मुश्किल हो रहा है। जो पढ़ाई तीन अध्यापक करते थे, वो अकेले कर रही हैं। इसके अलावा पंचायत के करोट स्कूल में भी करीब 50 बच्चों को एक शिक्षक पढ़ाई करवा रहे हैं। स्कूल शिक्षक रामपाल अपना सारा समय बच्चों को देते हैं। बच्चों की संख्या ज्यादा है। कोई दूसरा शिक्षक भी नहीं है। ऐसे में पांच कक्षाएं संभालना मुश्किल हो रहा है।
उप निदेशक प्रारंभिक शिक्षा कुलभूषण राजेश ने कहा कि उन्होंने रिक्त पद भरने के लिए विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजा है। कोशिश की जा रही है कि खाली पदों को शीघ्र भरा जाए।