फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bilaspur News: दांतों और जबड़े की जांच के लिए एम्स में स्थापित होगी सीबीसीटी मशीन

विज्ञापन
विज्ञापन
दांतों और जबड़े से लेकर चेहरे की हड्डियों तक की जांच में होगी सहायक, बीमारी का पता लगाने में मिलेगी थ्रीडी तस्वीरों की मदद
विज्ञापन

प्रत्यारोपण और जटिल सर्जरी से पहले डॉक्टरों को मिलेगी विस्तार से जानकारी
सामान्य एक्स-रे से स्पष्ट न होने वाली कुछ समस्याओं की जांच में उपयोगी होगी तकनीक

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। दांतों में दर्द, जबड़े की हड्डी से जुड़ी परेशानी या दांत प्रत्यारोपण करवाने वाले मरीजों के लिए एम्स बिलासपुर में आधुनिक जांच सुविधा उपलब्ध करवाने की तैयारी है। संस्थान में क्रेनियोफेशियल क्षेत्र की जांच के लिए कोन बीम कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीबीसीटी) मशीन खरीदी जाएगी। इस मशीन से दांतों, जबड़े और चेहरे की हड्डियों की त्रिआयामी (थ्रीडी) तस्वीरें तैयार की जा सकेंगी। इससे डॉक्टरों को प्रभावित हिस्से की बनावट समझने, बीमारी की स्थिति का आकलन करने और उपचार की योजना तैयार करने में मदद मिलेगी। मशीन की खरीद के लिए जारी दस्तावेजों में उपकरण की आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण और संचालन शुरू करने की प्रक्रिया शामिल है।
सीबीसीटी तकनीक का इस्तेमाल मुख्य रूप से दांतों, जबड़े और चेहरे की हड्डियों की विस्तृत तस्वीरें प्राप्त करने के लिए किया जाता है। सामान्य दंत एक्सरे में किसी हिस्से की द्विआयामी तस्वीर मिलती है, जबकि सीबीसीटी से संबंधित क्षेत्र की तीन आयामी तस्वीर तैयार होती है। इससे डॉक्टर दांतों और हड्डियों की स्थिति को अलग-अलग कोणों से देख सकते हैं। यह तकनीक उन मामलों में उपयोगी हो सकती है, जिनमें सामान्य एक्सरे से पर्याप्त जानकारी नहीं मिलती और उपचार से पहले विस्तृत जांच की जरूरत होती है। मसूड़ों के भीतर दबे दांत, विशेषकर अक्ल दाढ़ की जटिल स्थिति में भी यह तकनीक उपयोगी हो सकती है। कई बार दांतों की जड़ें आसपास की नसों या अन्य संरचनाओं के नजदीक होती हैं। ऐसे मामलों में विस्तृत तस्वीरों से डॉक्टरों को दांत की स्थिति समझने और उसे निकालने की प्रक्रिया की योजना बनाने में सहायता मिलती है। सीबीसीटी का इस्तेमाल जबड़े की हड्डियों की बनावट, कुछ प्रकार की चोटों, दांतों की जड़ों से जुड़ी जटिल समस्याओं और चेहरे की हड्डियों की संरचना का आकलन करने में किया जा सकता है। जिन मरीजों को जबड़े या चेहरे की हड्डियों से संबंधित सर्जरी की जरूरत होती है, उनके लिए प्रभावित हिस्से की विस्तृत तस्वीरें उपचार की योजना बनाने में मददगार हो सकती हैं। इससे डॉक्टर मरीज की समस्या को बेहतर तरीके से समझकर आवश्यक उपचार तय कर सकते हैं। हालांकि, सीबीसीटी सामान्य एक्सरे का विकल्प हर स्थिति में नहीं है। इस जांच में भी एक्स-रे विकिरण का इस्तेमाल होता है और इसकी मात्रा मशीन, जांच वाले हिस्से तथा अपनाई गई प्रक्रिया पर निर्भर करती है। इसलिए डॉक्टर मरीज की जरूरत के अनुसार ही इसकी सलाह देते हैं। यह तकनीक मुख्य रूप से दांतों और हड्डियों की संरचना देखने में उपयोगी है।
विज्ञापन

दांत प्रत्यारोपण से पहले मिलेगी मदद
दांत प्रत्यारोपण करवाने वाले मरीजों के लिए सीबीसीटी जांच उपयोगी हो सकती है। प्रत्यारोपण से पहले जबड़े की हड्डी की ऊंचाई, चौड़ाई और आसपास की संरचनाओं की स्थिति जानना जरूरी होता है। थ्रीडी तस्वीरों की मदद से डॉक्टर यह आकलन कर सकते हैं कि प्रत्यारोपण के लिए हड्डी पर्याप्त है या नहीं। इससे उपचार की योजना तैयार करने और आसपास की महत्वपूर्ण संरचनाओं की स्थिति समझने में मदद मिल सकती है।
विज्ञापन

स्थापना के बाद शुरू होगी सुविधा
एम्स बिलासपुर की ओर से जारी अधिकारिक अधिसूचना में इस मशीन की खरीद के लिए जारी दस्तावेज के अनुसार उपकरण की आपूर्ति की अवधि 90 दिन निर्धारित की गई है। उपकरण की स्थापना, परीक्षण और संचालन शुरू करने का काम भी आपूर्ति प्रक्रिया का हिस्सा है। मशीन पर दो साल की वारंटी और इसके बाद आठ साल का व्यापक रखरखाव अनुबंध रखने का प्रावधान है। इससे उपकरण के रखरखाव और तकनीकी खराबी की स्थिति में सेवा उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की गई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें