स्वारघाट(बिलासपुर)। स्वारघाट उपमंडल के तहत पंजाब राज्य के साथ सटे एक निजी स्कूल में बच्चों को स्कूल बुलाकर पढ़ाने के मामले में शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा था। जिसके बाद उप शिक्षा निदेशक बिलासपुर ने स्पष्टीकरण रिपोर्ट को शिक्षा निदेशालय शिमला और एसडीएम स्वारघाट को भेज दिया है। स्कूल प्रबंधन स्पष्टीकरण में कहा है कि नौ जून को बच्चों को किताबें बांटने के लिए स्कूल बुलाया गया था। उक्त तिथि को जो बच्चे किताबें लेने नहीं आये थे उन्हें 13 जून को बुलाया गया था। स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को लाने ले जाने के लिए स्कूल बस का प्रयोग करने से भी साफ इनकार किया है। स्कूल प्रबंधन के एक पदाधिकारी ने रविवार को सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर मीडिया पर तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश करने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, बच्चों के वायरल वीडियो पूरी हकीकत बयान कर रहे है। वीडियो में साफद़ेखा जा सकता है कि स्कूल में बच्चों को किताबें नहीं बांटी जा रही। वीडियो में साफ नजर आ रहा था कि बच्चों को क्लास में पढ़ाया जा रहा था।
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ये था मामला----
- उल्लेखनीय है कि शनिवार को स्वारघाट उपमंडल क्षेत्र के एक निजी स्कूल द्वारा सरकारी आदेश के बावजूद स्कूल खोलकर बच्चों को पढ़ाने के वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुए थे। मीडिया में मामला आने के बाद शिक्षा विभाग इस मामले में अलर्ट हुआ। शिक्षा विभाग ने उपरोक्त मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए स्कूल प्रबंधन का स्पष्टीकरण मांगकर मांगा था।
इनसेट----
निजी स्कूल प्रबंधन से स्पष्टीकरण लेने के बाद रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय व एसडीएम स्वारघाट को प्रेषित की गई है। वहीं स्कूल संचालन से संबंधित संस्था से भी इस मामले में जवाब तलब किया जाएगा। विभाग हर मामले की जांच कर रहा है।
---सुदर्शन कुमार उप शिक्षा निदेशक प्रारंभिक शिक्षा बिलासपुर
इनसेट----
स्कूल ने भले की मामले में अपना बचाव करते हुए कहा कि बच्चों को स्कूल किताबें देने के लिए बुलाया गया था। ऐसे में सवाल उठता है कि स्कूल में किताबें किस आधार पर दी जा रही थी। क्या निजी स्कूल में किताबें बेची जा रही थी? जबकि सरकार ने सरकारी स्कूलों में किताबें देने पर रोक लगा रखी है। विभाग इस मामले की भी जांच कर रहा है।
----विक्रम ठाकुर