आरोपी का फरार होना इस बात का संकेत है कि घोटाले में उसकी भूमिका अहम रही है। अब जांच एजेंसियां उसकी गिरफ्तारी को पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की अहम कड़ी मान रही हैं। जानकारी के मुताबिक पहले से गिरफ्तार वरिष्ठ सहायक सुभाष को न तो पैसों के लेनदेन की जानकारी थी और न ही पूरे नेटवर्क का अंदाजा। उससे जो भी काम कराया जाता था, उसके बदले उसे शराब की एक बोतल उपलब्ध कराई जाती थी। इसी कारण जांच के दौरान पैसों की परतों को लेकर सुभाष कोई ठोस जानकारी नहीं दे पा रहा है। जांच में सामने आया है कि जब वाहन पंजीकरण पोर्टल को बीएस-4 से बीएस-6 में बदला जा रहा था, उसी दौरान बैकएंड के जरिये सैकड़ों वाहनों की फर्जी एंट्री की गई। उस समय गौरव आरएलए बिलासपुर में तैनात था।
आरोप है कि उसके पास विभाग के अन्य कर्मचारियों और उच्चाधिकारियों की लॉगिन आईडी और पासवर्ड थे, जिनका इस्तेमाल कर फर्जी रजिस्ट्रेशन को अप्रूव किया गया। बताते चलें कि दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने गत बुधवार रात और वीरवार को बिलासपुर में गौरव के घर पर दबिश दी थी, लेकिन आरोपी का कोई सुराग नहीं मिला। पुलिस को मौके पर उसकी आलीशान कोठी और लग्जरी गाड़ियां ही मिलीं, जिनकी फोटोग्राफी की गई है। सूत्रों का दावा है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए गौरव दिल्ली में अग्रिम जमानत लेने की कोशिश कर रहा है। बताया जा रहा है कि उसने पहले भी जमानत अर्जी दायर की थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। अब दोबारा जमानत के प्रयास किए जा रहे हैं।