बिलासपुर स्कूल में दो दिवसीय आपदा प्रबंधन कार्यशाला में 140 शिक्षकों ने लिया भाग
संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला (बिलासपुर)। जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) जुखाला ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला छात्र बिलासपुर में दो दिवसीय आपदा प्रबंधन कार्यशाला आयोजित की।
कार्यशाला में सदर शिक्षा खंड के 26 वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला व 19 उच्च पाठशाला के स्कूल प्रबंधन कमेटी के सदस्यों ने भाग लिया। कार्यशाला में डॉ. नीलम शर्मा ने आपदा के मुख्य खतरे, संजय ठाकुर ने संस्थागत ढांचा, आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल और आग से बचाव शशि शर्मा ने मुख्य खतरे जैसे भूकंप भूस्खलन, बादल फटना, आग संरचनात्मक, गैर संरचनात्मक व मानसिक एवं सामाजिक प्रभाव आदि के बारे में जानकारी की। स्त्रोत वक्ताओं ने जानकारी देते हुए बताया कि आपदा दो प्रकार की होती है। एक प्राकृतिक व दूसरी मानव जनित। प्राकृतिक आपदा में जैसे बिजली गिरना, भूकंप, चक्रवात आते हैं। मानव जनित जैसे गैस लीक, जंगलों में आग लगाना, उद्योगों से निकलने वाले जहरीले पदार्थ इत्यादि। खंड परियोजना अधिकारी व प्रधानाचार्य वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला छात्र बिलासपुर श्याम लाल ने बताया कि 2001 में गुजरात के भुज में भूकंप आया जिसकी तीव्रता 7.7 थी। इसमें करीब 20 हजार लोग मारे गए और लाखों घायल हुए थे। इसके बाद 2005 में संसद में आपदा प्रबंधन पर बिल पास हुआ। 2010 में आपदा प्रबंधन पर पहली बार प्रशिक्षण दिया गया। अब स्कूलों में हर साल प्रबंधन समिति के सदस्यों व अध्यापकों को प्रशिक्षण के अलावा स्कूलों में मॉक ड्रिल करवाई जाती है। इसका उद्देश्य है कि बच्चे व अन्य किसी भी आपदा के समय बचाव कर सके ताकि जानी नुकसान से बचा जा सके। इस कार्यशाला में 140 अध्यापकों व स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों ने हिस्सा लिया।