बिलासपुर के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में आयोजित श्रीराम कथा में उपस्थित श्रद्धालु। संवाद
कथा में सुनाया राम जन्म प्रसंग, भक्त हुए गदगद
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही श्री राम कथा के चौथे दिन कथावाचक भास्करानंद शर्मा ने भगवान राम के जन्म की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीराम एक अवतारी पुरुष थे, जिन्हें विष्णु जी का सातवां अवतार माना जाता है।
कथा सुनाते हुए कहा कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान राम ने इस धरती पर जन्म लिया था। वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि राजा दशरथ को संतान प्राप्ति नहीं हो रही थी। उन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ करने का फैसला लिया। राजा दशरथ ने यज्ञ का प्रसाद अपनी तीनों पत्नियों कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी को दिया। प्रसाद के फलस्वरूप रानी कौशल्या ने गर्भधारण किया और इस तरह चैत्र शुक्ल नवमी को श्रीराम जन्मे। कहते हैं कि शिशु का वर्ण नीला था, चेहरे पर तेज और अत्यंत आकर्षक था। जिस भी व्यक्ति ने उस शिशु को देखा मोहित हो गया। यज्ञ प्रसाद के फलस्वरूप राजा दशरथ की दूसरी रानी सुमित्रा ने दो और कैकेयी ने एक पुत्र को जन्म दिया। राजा दशरथ के सभी पुत्र तेजस्वी हुए। इन चारों भाइयों का नाम राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न रखा गया। उन्होंने कहा कि श्री राम के जन्म के बाद देवताओं ने आसमान से पुष्प वर्षा की थी। अप्सराओं ने नृत्य किया। चारों ओर उल्लास था। समय बीतने के साथ-साथ राम अपने तीनों भाइयों से ज्यादा गुणवान होते गए। वे सभी विषयों में पारंगत हो गए। इसलिए तीनों भाई भी उनको बहुत मानते थे। कथा समापन पर भगवान श्री राम के सुंदर भजन गाए तथा प्रसाद वितरण किया गया।