फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bilaspur News: फसलों के बचाने के लिए लोग लगा रहें फिरोमोन ट्रेप

Sun, 14 Jul 2024 11:19 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
विज्ञापन
जुखाला क्षेत्र में किसान द्वारा लगाया गया फिरोमोन ट्रैप। संवाद
विज्ञापन
कद्दू वर्गीय फसलों में फल छेदक मक्खी बैठने होता है सड जाती है फसल
विज्ञापन

-फिरोमोन ट्रेप में आकर्षित होकर मर जाती है फल छेदक मक्खी

संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला (बिलासपुर)। जुखाला के किसानों ने कद्दू वर्गीय फसलों को फल छेदक मक्खी से बचाने के लिए फिरोमोन ट्रेन उपकरण लगाएं हैं। दरअसल फल छेदक मक्खी बेल वाली फसलों जैसे कद्दू, घीया और लौकी आदि पर बैठती है और फलों को नुकसान पहुंचाती है, जिससे सब्जियां या तो सड़ जाती है या इनमें कीड़े पर जाते हैं। इस के बचाव के लिए कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर ने फिरोमोन ट्रेप बनाया है।
विज्ञापन

ट्रेप को पानी की खाली बोतल में पीली टेप लगाकर इसमें लकड़ी का गुटका लगाया होता है। गुटके में मादा फ्रूट फ्लाई के हार्मोन की लेयर लगाई जाती है। इसके बाद इसे कद्दू वर्गीय फसलों में लटका दिया जाता है। पीली टेप व मादा फ्रूट फ्लाई के हार्मोन के नर फ्रूट फ्लाई इस बोतल के अंदर चली आती है उसके बाद वह बाहर नहीं निकल पाती है। इस कारण फ्रूट फ्लाई की प्रजनन क्रिया पर असर पड़ता है और कद्दू वर्गीय फसलों से इस मक्खी से बचाव हो जाता है। जिले के चार कृषि खंड श्री नयना देवी जी, सदर, घुमारवीं और झंडूता में करीब आठ प्रतिशत भूमि पर कद्दू वर्गीय फसलों की खेती होती है। एक बीघा भूमि के लिए चार ट्रेप की जरूरत पड़ती है। इसमें जो लकड़ी का गुटका लगा होता है उसको 20-25 दिन बाद बदल लेना चाहिए। क्योंकि अगर इसमें गंध नहीं होगी तो इस में कोई भी फ्रूट फ्लाई आकर्षित नहीं होती है। इसके प्रयोग से किसान इन सब्जियों पर किसी भी रासायनिकों के छिड़काव से भी बचा रहता है और प्राकृतिक रूप से इस मक्खी से अपनी फसलों को किसान बचा सकते हैं। बाजार में इस ट्रेप की कीमत करीब 250 रुपये तक होती है लेकिन किसान इसे खुद भी बना सकते हैं। बाजार से सिर्फ इस लकड़ी का गुटका लेने की जरूरत होती है। बीटीएम सदर निखिल कुमार ने बताया की सदर कृषि में करीब 1700 किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। कद्दू वर्गीय फसलों के लिए यह ट्रेप बहुत ही उपयोगी है। इससे बिना रासायनिक दवाओं के इन फसलों को बचाया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें