-कल्याण कला मंच की मासिक बैठक और संगोष्ठी का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले की अग्रणी कला कलम संस्था कल्याण कला मंच की मासिक बैठक और संगोष्ठी बांमटा में हुई। बैठक की अध्यक्षता मंच के प्रधान सुरेंद्र मिन्हास ने की। मंच का संचालन सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य अमरनाथ धीमान ने किया।
बैठक में सबसे पहले घुमारवीं के लश्करी राम ने अनमोल बेटी, बेटी जननी बेटी से यह जीवन कविता प्रस्तुत की। इसके बाद घुमारवीं की ही वीना वर्धन ने मैं मजदूर हूं, शान, शौकत से कोसों दूर हूं, रामपाल डोगरा ने विस्थापन के दर्द को बयां करते हुए कहा कि बिलासपुर उजड़ों का शहर, पड़ा था भाखड़ा बांध से कहर, झंडूता की विजय कुमारी सहगल ने सरहद पर भी हम जैसे शक्ल सूरत के लोग रहते हैं, सेवानिवृत्ति प्रधानाचार्य पनोह की विदुषी शीला सिंह ने मानवता तो गूंगी बहरी, देख तमाशा आज चीर हरण कर रहे दुशासन सस्ती दिखती लाज, पंडोखर की युवा कवयित्री पूनम शर्मा ने नील गगन के पंछी थे हम गीत खुशी के गाते थे, सुन्हाणी की भजन गायिका तृप्ता रानी वर्धन ने लड़ फड़यिा तेरा श्याम हूंण छडया नी जाणा, सेवानिवृत्त शिक्षा संयुक्त निदेशक सुशील पुंडीर परिंदा ने धन्नु मेरा परम मित्र भले ही वह धनवान नहीं, रविंद्र चंदेल कमल ने सूरज को आकर चमकना ही होगा, नित चलना ही होगा कविता सुनाई। डियारा सेक्टर के शिक्षक राकेश मिन्हास ने उपनिषदों गीता का यथार्थ दर्शन नामक गीत प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी। गायत्री देवी ने भजन ओ राधिके गऊवां उतर पहाड़ा थे आईयां, मंच संचालक अमरनाथ धीमान ने किने मांणू, जोराने हक्का पाईयंआ, किने मेरा खड़काई दित्या द्वार, अजय कुमार ने मैं तो भी वहीं था जब वह झगड़े थे किंतु था प्रतिक्रिया विहीन, डाहड के विद्वान बुद्धि सिंह चंदेल ने सुन रे सी जिनपिंग तुम सुन लो अधिक जहर मत घोलो कभी तो मीठी वाणी बोलो कविता सुनाई। कार्यक्रम के अध्यक्ष सुरेंद्र मिन्हास ने सभी प्रस्तुत रचनाओं की समीक्षा के बाद अपनी कविता यूं कहीं मेरे जिगरे दा टुकड़ा गवाची गया, टोला टोला सारे जने बाटा जांदे बन्ने बन्ने प्रस्तुत की। इस अवसर पर शीला सिंह, बुद्धि सिंह चंदेल और अन्य उपस्थित रहे।