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बजट के बावजूद डबल लेन नहीं हुआ शिमला मटोर एनएच

Wed, 02 Dec 2015 06:02 PM IST
गोपाल शर्मा /अमर उजाला, जुखाला (बिलासपुर)।
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 नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (लोनिवि) की शिमला-मटोर एनएच को डबल लेन करने की योजना राज्य सरकार की लेटलतीफी के कारण लटक गई है।
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ब्रह्मपुखर से कंदरौर तक भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया के लिए वर्ष 2014-15 का 24 करोड़ रुपये का बजट पहले ही लैप्स हो चुका है। अब वर्ष 2015-16 के लिए मार्च महीने में जारी हुआ 14.40 करोड़ रुपये का बजट भी लैप्स होने की कगार पर है।

भू-अधिग्रहण के लिए नायब तहसीलदार बिलासपुर को भू-अर्जन अधिकारी नियुक्त किया गया है। लेकिन, उनके कार्यालय में स्टाफ का टोटा चल रहा है। इस वजह से भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। सात महीने से भू-अधिग्रहण के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ है।
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भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू न होने के कारण सड़क के दायरे में आने वाले लोग असमंजस की स्थिति में है। हालात यह है कि अधिसूचना जारी होने के कारण लोग क्षेत्र में नया निर्माण नहीं कर पा रहे।

लोनिवि एनएच अथॉरिटी के अनुसार जुखाला उपमंडल के तहत 2014 में पहले ब्रह्मपुखर से कंदरौर तक लगभग 24 किलोमीटर की सड़क को डबल लेन करने की मंजूरी मिली थी। जुखाला की ओर से निशानदेही भी की गई है। लेकिन, भू अर्जन विभाग की ओर से कोई भी कार्यवाही नहीं की जा रही।

इससे वर्ष 2014-15 का बजट पहले ही लैप्स हो गया है। जबकि मार्च 2015 के बाद अथॉरिटी ने 14.40 करोड़ रुपये का और बजट मंजूर किया है। लेकिन, आठ महीने बीत जाने के बाद भी भू-अधिग्रहण के लिए कोई कार्यवाही शुरू नहीं की जा रही।

इस संदर्भ में एनएच अथॉरिटी की ओर से कई बार भू-अर्जन अधिकारी से पत्राचार भी किया गया। बावजूद इसके काम आगे नहीं बढ़ रहा है।  भू-अर्जन अधिकारी का कहना है कि स्टाफ की कमी के कारण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।

लोनिवि एनएच अथॉरिटी के सहायक अभियंता डीसी शर्मा ने बताया कि भूमि अधिग्रहण करने के लिए भू-अर्जन अधिकारी बिलासपुर से कई बार पत्राचार किया गया है। 2014-15 के लिए जारी बजट पहले ही लैप्स हो चुका है। लिहाजा, कार्य जल्द शुरू किया जाना चाहिए। लेकिन, भू अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा रही। इस वजह से सड़क को डबल लेन करने का कार्य लटका हुआ है।
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भू-अर्जन अधिकारी एवं नायब तहसीलदार प्रकाश चंद ने बताया कि उनके पास स्टाफ की कमी चल रही है। पटवारी के चार पद सृजित हैं। इनमें से एक खाली चल रहा है।

जबकि दो पटवारी प्रतिनियुक्ति पर मंडी भेजे गए हैं। जबकि एक पटवारी कोर्ट केस देख रहा है। इस वजह से कुछ भी नहीं किया जा सका है। इस बारे आलाधिकारियों के माध्यम से सरकार को भी सूचित कर दिया गया है।
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