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Bilaspur News: भाखड़ा विस्थापितों ने लंबित समस्याओं के स्थायी समाधान की उठाई मांग

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तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश्वर वाणी को ज्ञापन सॉफ्टवेयर भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति के पदाधिकार
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समिति ने मंत्री राजेश धर्माणी को सौंपा ज्ञापन,भूमि स्वामित्व से लेकर बिजली-पानी और पुनर्वास के मुद्दे उठाए
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भाखड़ा बांध निर्माण के लिए जमीन, मकान और आजीविका का त्याग करने वाले विस्थापित परिवारों की वर्षों से लंबित समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग को लेकर जिला ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति ने तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी को ज्ञापन सौंपा। समिति ने पुनर्वास से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने और विस्थापित परिवारों को उनका अधिकार दिलाने की मांग की। समिति अध्यक्ष देश राज शर्मा ने कहा कि भाखड़ा बांध के निर्माण के दौरान बिलासपुर के हजारों परिवारों ने देश के विकास के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया। इसके बावजूद कई दशक बीतने के बाद भी अनेक परिवार भूमि स्वामित्व, पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने भाखड़ा विस्थापित बहुल क्षेत्रों का बंदोबस्त करवाकर लंबे समय से कब्जे में चल रही भूमि का मालिकाना हक देने की मांग की। समिति ने बिजली और पानी के काटे गए कनेक्शन बहाल करने के साथ विस्थापित परिवारों को बिजली और पेयजल की सुविधा निशुल्क उपलब्ध करवाने की मांग रखी। गोविंद सागर झील से पेयजल और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाने तथा जिन परिवारों को अभी तक प्लॉट और भूमि आवंटित नहीं हुई है, उन्हें जल्द जमीन और प्लॉट देने की मांग भी की गई। समिति पदाधिकारियों ने कहा कि विस्थापितों ने प्रदेश और देश के विकास के लिए बड़ा त्याग किया है। ऐसे में उनकी मांगों को अब और लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। सरकार को सभी समस्याओं का स्थायी समाधान कर विस्थापित परिवारों को उनका हक दिलाना चाहिए। इस अवसर पर बलदेव ठाकुर, श्री राम चौहान, कुंजू राम, चिरंजी लाल, प्रेम सिंह, गरजा राम, जय राम और रमेश चंद समेत समिति के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
बीबीएमबी में आरक्षण और 25 प्रतिशत रॉयल्टी की मांग
समिति ने विस्थापित परिवारों के बच्चों को बीबीएमबी और अन्य सरकारी सेवाओं में उचित आरक्षण एवं प्राथमिकता देने की मांग उठाई। साथ ही भाखड़ा परियोजना से उत्पादित बिजली की रॉयल्टी का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा विस्थापित क्षेत्रों के विकास पर खर्च करने की मांग की। इसके अलावा गोबिंद सागर झील क्षेत्र में आवागमन की समस्या दूर करने के लिए बैरी-दड़ोला से लुहणू, ज्योरीपत्तन, बवखाल, बुखर-कोसरियां, गाह-चलैला और डेहण-नारल में पुलों का जल्द निर्माण करवाने की मांग भी ज्ञापन में रखी गई।
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पर्यटन विकास और वन अधिकार पट्टे देने की मांग
समिति ने मछुआरों और दौलों के हितों की रक्षा के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू करने तथा गोबिंद सागर क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित कर स्थानीय विस्थापितों को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग की। वन भूमि पर बसे भाखड़ा विस्थापित परिवारों को आवास, कृषि भूमि और पशुशालाओं के लिए वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत अधिकार-पट्टे देने की मांग भी उठाई गई।
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