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Bilaspur News: भाखड़ा विस्थापितों ने पौंग बांध विस्थापितों की तर्ज पर मांगी सुविधाएं

Sun, 10 Aug 2025 11:09 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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झंडूता में आयोजित जिला ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति की बैठक में भाग लेने वाले सदस्य। स्
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झंडूता में ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति ने समस्याओं पर किया मंथन
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विस्थापिता बोले, उजड़ने के बाद आज तक नहीं मिल पाया हक
उपायुक्त के समक्ष समिति उठाएगी विस्थापितों की समस्याएं

संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़/झंडूता (बिलासपुर)। जिला ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति की बैठक रविवार को श्री सर्वेश्वर महादेव मंदिर आनंदघाट में हुई। समिति के अध्यक्ष देशराज शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में भाखड़ा विस्थापितों ने विभिन्न समस्याओं पर मंथन किया और उनके समाधान पर चर्चा की।
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सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि समिति का एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही उपायुक्त राहुल कुमार से मिलेगा, ताकि उनके समक्ष ग्रामीण भाखड़ा विस्थापितों की समस्याओं को रखा जा सके। समिति ने कहा कि भाखड़ा बांध बनने के बाद उजड़े लोगों को उनका हक नहीं मिल पाया है। भाखड़ा विस्थापित एवं प्रभावित क्षेत्रों का मिनी सेटलमेंट करवाया जाए और उनके कब्जे वाली जमीन का मालिकाना हक प्रदान किया जाए। इसके अलावा भाखड़ा विस्थापितों को पौंग बांध के विस्थापितों की तर्ज पर उन्हें भी सुविधाएं प्रदान की जाएं। भाखड़ा से मिलने वाली रायल्टी का पैसा विस्थापितों व प्रभावितों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर खर्च किया जाए। जिन विस्थापितों को प्लाट नहीं दिए गए हैं, उन्हें प्लाट दिए जाएं और जिन विस्थापितों को जमीन नहीं मिली है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जमीन उपलब्ध करवाई जाए। देशराज ने कहा कि भाखड़ा विस्थापित आज भी प्लाट मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा जिन भाखड़ा विस्थापितों ने अपने मकान बनाए हैं, उनके सेटलमेंट अभी भी लंबित हैं। विस्थापितों ने बुर्जियों को लगाने का मुद्दा भी उठाया और बुर्जियों को सही ढंग से लगाने की बात कही। देशराज ने कहा कि भाखड़ा बांध बनने से अस्तित्व में आई गोबिंद सागर झील में बिलासपुर शहर व 205 गांव उजड़ गए थे। विस्थापितों के लिए उस समय न तो पुनर्वास नीति केंद्र सरकार ने बनाई और न ही प्रदेश सरकार ने। विस्थापन के 13 वर्ष बाद 1971 में पुनर्वास के नियम बनाए गए। इनमें शहर व ग्रामीण क्षेत्र के लिए अलग-अलग नियम बनाए गए, जिसके फलस्वरूप थोड़े से विस्थापितों को पुनर्वासित किया गया। लेकिन सही तरीके से निशानदेही नहीं हुई, जिस कारण लोगों ने अपने मकान कहीं और बना लिए जबकि जमीन कहीं और थी। इस कारण इन विस्थापितों पर दोबारा से विस्थापन की तलवार लटक गई है। करीब 350 लोगों के बिजली-पानी के कनेक्शन साल 2016 में काट दिए गए। समिति ने मांग उठाई की विस्थापितों की मांगों पर गौर कर उन्हें राहत प्रदान की जाए। इस मौके पर समिति उपाध्यक्ष राम चौधरी, बलदेव ठाकुर, चिरंजी लाल, प्रेम सिंह ठाकुर, बाबू राम, राज कुमार, डीआर चौहान सहित अन्य मौजूद रहे।
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