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Bilaspur News: भदरोग औद्योगिक क्षेत्र 15 करोड़ रुपये से होगा विकसित

Wed, 16 Oct 2024 11:34 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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बिलासपुर में पत्रकारों को संबोधित करते मंत्री राजेश धर्माणी। साथ में पूर्व विधायक बाबू राम गौतम
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- विभाग ने प्राक्कलन तैयार करके सरकार को भेजा
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- औहर में पर्यटन की दृष्टि से 250 करोड़ रुपये से तैयार होगा आधारभूत ढांचा
- फंड के लिए एडीबी से चल रही सरकार की वार्ता

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। उपमंडल घुमारवीं के भदरोग में औद्योगिक क्षेत्र को 15 करोड़ रुपये से विकसित किया जाएगा। उद्योग विभाग ने इसका प्राक्कलन सरकार को भेज दिया है।
धनराशि स्वीकृत होने के बाद भदरोग में औद्योगिक क्षेत्र के लिए चयनित भूमि में प्लॉट और सडक़ें बनाई जाएंगी। इसके अलावा बिजली और पानी की सप्लाई पहुंचाई जाएगी। घुमारवीं शहर के साथ लगते भदरोग में 40 बीघा जमीन औद्योगिक क्षेत्र के लिए चयनित की गई है। जमीन उद्योग विभाग के नाम हो चुकी है। उद्योग लगने से स्थानीय लोगों के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के द्वार खुलेंगे।
नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने परिधि गृह बिलासपुर में अनौपचारिक वार्ता में बताया कि भदरोग औद्योगिक क्षेत्र में प्लॉट, सड़क बनाने और बिजली-पानी की आपूर्ति पहुंचाने के लिए 15 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। इस राशि को स्वीकृति के लिए सरकार के पास भेजा गया है। उन्होंने बताया कि औहर में फोरलेन के पास पर्यटन की दृष्टि से विशेष क्षेत्र को विकसित किए जाने का काम चल रहा है। यहां दूसरे चरण हेलीपैड सहित विभिन्न प्रकार के आधारभूत ढांचे बनाए जाने हैं। इसके लिए 250 करोड़ रुपये की योजना बनाई गई है। इसकी फंडिंग के लिए एडीबी से बात चल रही है। उन्होंने बताया कि जिले में हिमुडा कॉलोनी के लिए भूमि की तलाश की जा रही है। भूमि मिलने पर कॉलोनी सहित मॉल जैसे व्यापारिक प्रतिष्ठान बनाने की योजना है।
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इनसेट
प्लानिंग क्षेत्र के बाहर भी भवन बनाने पर लगेगा टीसीपी एक्ट
नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने बताया कि प्रदेश में प्लानिंग क्षेत्र के बाहर भी 1,000 वर्ग मीटर (सवा बीघा) से अधिक भूमि पर आधारभूत ढांचा बनाने पर टीसीपी एक्ट लागू होगा। 1,000 वर्ग मीटर से अधिक भूमि पर भवन आदि बनाने के लिए टीसीपी मंजूरी लेनी होगी। यह विधेयक हाल ही में विधानसभा सत्र पारित किया गया है। बताया कि प्रदेश में देखा गया है कि प्लानिंग क्षेत्र के बाहर नदी-नालों के किनारे और भूस्खलन क्षेत्र में बहुमंजिला और बड़े भवन बनाए गए हैं। लेकिन उनकी जांच करने का कोई प्रावधान नहीं है। आपदा के दौरान देखा गया है कि नदी-नालों के किनारे और भूस्खलन क्षेत्र में बने भवनों को ही ज्यादा नुकसान पहुंचा। इसी नुकसान से बचने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
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इनसेट
खुद काम नहीं किया, अब विरोधी उठा रहे उंगली : धर्माणी
मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि गोबिंद सागर झील भाखड़ा बांध बनने के बाद से ही है। लेकिन अब तक किसी ने पर्यटन की दृष्टि से झील और आसपास के क्षेत्र को विकसित करने का काम नहीं किया। अब वह काम कर रहे तो विरोधी राजनीतिक द्वेष से उंगली उठा रहे हैं। बताया कि उपायुक्त बिलासपुर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय पर्यटन विकास और प्रमोशन कमेटी का गठन किया गया, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारी हैं। मंत्री होने के नाते वह भी इस कमेटी में शामिल हो सकते थे। लेकिन कमेटी का राजनीतिकरण न हो इसके लिए वह खुद ही शामिल नहीं हुए। पर्यटन से संबंधित हर निर्णय यही कमेटी लेगी।
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