बिलासपुर विशेष न्यायाधीश ने जारी आदेश में कीं तल्ख टिप्पणियां
युवा पीढ़ी को बचाने के लिए नशा तस्करों से सख्ती से निपटना जरूरी
नशे का यह मकड़जाल समाज के लिए बन चुका है घातक बीमारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नशे के बढ़ते कारोबार और युवाओं के इसके दलदल में फंसने पर बिलासपुर की विशेष अदालत ने बेहद सख्त टिप्पणी की है। विशेष न्यायाधीश बिलासपुर ज्योत्सना सुमंत डढवाल की अदालत ने चरस तस्करी की आरोपी महिला की जमानत याचिका को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि नशे का यह मकड़जाल समाज के लिए घातक बीमारी बन चुका है। अदालत ने अपने 6 पन्नों के विस्तृत आदेश में स्पष्ट किया कि बिलासपुर जिला अब पड़ोसी राज्यों से आने वाले नशे का ट्रांजिट रूट बनता जा रहा है और अपराधियों के प्रति किसी भी नरमी का अर्थ न्याय के विफल होने से है।
कोर्ट ने कहा कि नशे की लत तेजी से फैल रही है। चिट्टा और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स युवाओं को एक ऐसी भूलभुलैया में धकेल रहे हैं, जहां से वापसी मुश्किल है। आदेश में कहा गया कि पंजाब और अन्य राज्यों से आने वाले नशे के लिए बिलासपुर प्रमुख मार्ग बन गया है। ऐसे में अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करना आवश्यक है। अदालत ने नोट किया कि आरोपी महिला के व्यवहार में कोई सुधार या पछतावा नहीं दिखता। यदि जमानत दी गई, तो यह न्याय प्रक्रिया को विफल करने जैसा होगा। न्यायालय ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाते हुए कहा कि इस मामले में समाज के हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पूरा मामला 31 जनवरी 2026 का है। पुलिस थाना घुमारवीं की टीम ने बलोह लिंक रोड, डैहर-कंदरौर पर नाकाबंदी की थी। रात करीब 12:10 बजे मंडी की ओर से आ रही स्विफ्ट डिजायर कार को तलाशी के लिए रोका गया। कार में कुल्लू का रोपा निवासी और उसकी पत्नी सवार थे। पुलिस को देखते ही चालक घबरा गया। स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में गाड़ी की तलाशी ली गई, तो एक बैग से छह पैकेट बरामद हुए, जिनमें कुल 4.053 किलो चरस थी। पुलिस ने दंपती को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज किया। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि जमानत देते समय अपराध की प्रकृति, सजा की गंभीरता और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका जैसे कारकों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बरामद चरस वाणिज्यिक श्रेणी की है, इसलिए एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 की कठोर शर्तें लागू होती हैं। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि आरोपी महिला किसी भी राहत की पात्र नहीं है।