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Bilaspur News: डीजल और बैटरियां चोरी के मामले में चालक की अग्रिम जमानत खारिज

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अदालत की सख्त टिप्पणी, जांच में सहयोग नहीं करने पर नहीं मिली राहत
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टिपर से 146 लीटर डीजल और बैटरियां चोरी करने का है मामला

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बिलासपुर अदालत ने टिपर से डीजल और दूसरे वाहन की बैटरियां चुराने के आरोपी चालक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने कहा कि मामले की जांच शुरुआती चरण में है तथा आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है, इसलिए उसे अग्रिम राहत नहीं दी जा सकती।
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घुमारवीं थाना में दर्ज एफआईआर में शिकायतकर्ता ने बताया कि उसके पास सात से आठ टिपर हैं। आरोपी पिछले सात-आठ महीनों से उनके टिपर पर चालक के रूप में कार्यरत था। शिकायतकर्ता के अनुसार 5 मई को आरोपी ने कोठीपुरा स्थित इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप से 146 लीटर डीजल भरवाया, जिसकी कीमत 12,591 रुपये थी। इसके बाद वह टिपर को अपने गांव नैन गुजरां ले गया। शिकायत में कहा गया कि 9 मई को आरोपी बिना अनुमति टिपर को घुमाणी चौक में खड़ा कर गया। वहां शिकायतकर्ता का दूसरा टिपर भी खड़ा था। आरोपी वाहन की चाबियां बंपर और डैशबोर्ड में छिपाकर मोबाइल बंद कर मौके से फरार हो गया। बाद में जब दूसरे चालक ने टिपर की जांच की तो उसमें डीजल गायब मिला। साथ ही पास में खड़े दूसरे टिपर की दोनों बैटरियां भी चोरी पाई गईं। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने डीजल चोरी कर बेचने और बैटरियां कबाड़ी को बेचने की बात स्वीकार की है। मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) के तहत केस दर्ज किया है। अदालत में आरोपी की ओर से दलील दी गई कि उसे झूठा फंसाया गया है और गिरफ्तारी से उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचेगा। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी जांच में पूरा सहयोग करेगा और किसी भी सबूत से छेड़छाड़ नहीं करेगा। वहीं दूसरे पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी जांच में शामिल होने से बच रहा है। पुलिस का कहना था कि चोरी का सामान अभी बरामद नहीं हुआ है और आरोपी से पूछताछ जरूरी है। अभियोजन पक्ष ने अदालत से याचिका खारिज करने की मांग की। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि अग्रिम जमानत एक असाधारण राहत है, जिसे सामान्य परिस्थितियों में नहीं दिया जा सकता। अदालत ने माना कि आरोपी पर विश्वास का दुरुपयोग कर डीजल और बैटरियां चोरी करने के सीधे आरोप हैं। साथ ही चोरी का सामान किसे बेचा गया, इसकी जानकारी जुटाने के लिए आरोपी से पूछताछ जरूरी है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि 16 मई को आरोपी को अंतरिम राहत दी गई थी और जांच में शामिल होने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उसने शर्तों का पालन नहीं किया। अदालत ने कहा कि जांच में शामिल न होना आरोपी के फरार होने की आशंका को दर्शाता है। ऐसे में यदि उसे अग्रिम जमानत दी जाती है तो जांच प्रभावित हो सकती है। इन्हीं टिप्पणियों के साथ अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को निरस्त कर दिया।
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