कलोल में आयोजित कार्यशाला में बीजों का निरीक्षध करते विधायक जीतराम कटवाल व अन्य। स्रोत: भाजपा
कलोल में दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न, केंद्र की योजनाओं की दी जानकारी
पद्मश्री हरिमन शर्मा और नेकराम शर्मा ने किसानों को सिखाए बीज संरक्षण के गुर
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मानव विकास संस्थान कलोल में प्राकृतिक खेती और पारंपरिक बीज संरक्षण पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला मंगलवार को संपन्न हो गई। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल ने कहा कि रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से बचने के लिए अब प्राकृतिक खेती की ओर लौटना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल खेती का तरीका नहीं, बल्कि धरती और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य को बचाने का संकल्प है।
विधायक कटवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत का जो संकल्प लिया है, उसकी बुनियाद गांव और किसान पर टिकी है। जब तक किसान आत्मनिर्भर और स्वस्थ नहीं होगा, तब तक देश समृद्ध नहीं हो सकता। उन्होंने किसानों से केंद्र सरकार की मृदा स्वास्थ्य कार्ड, पीएम किसान सम्मान निधि और परंपरागत कृषि विकास योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया। कहा कि केमिकल खेती ने जमीन की उर्वरा शक्ति और लोगों की सेहत को बिगाड़ दिया है। प्राकृतिक खेती इसका वैज्ञानिक समाधान है। झंडूता विधानसभा क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले वर्ष आयोजित क्षेत्रीय संगोष्ठी, जिसमें गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने भाग लिया था, उसके सकारात्मक परिणाम क्षेत्र में देखने को मिल रहे हैं। बड़ी संख्या में स्थानीय किसान अब कम लागत वाली इस पद्धति को अपना रहे हैं। पद्मश्री हरिमन शर्मा और पद्मश्री नेक राम शर्मा ने किसानों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने अपने अनुभवों के जरिए बताया कि कैसे पारंपरिक बीजों का संरक्षण कर किसान खेती की लागत को शून्य कर सकते हैं और बेहतर आय प्राप्त कर सकते हैं। प्रदेश के सात जिलों से आए प्रगतिशील किसानों ने कार्यशाला में भाग लिया। संस्थान के निदेशक रसम सिंह चंदेल को इस सफल आयोजन के लिए विधायक ने बधाई दी।