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Bilaspur News: उत्तराखंड के कलाकारों ने मां नंदा देवी की जातरा नृत्य की दी प्रस्तुति

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-उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने भगवान राम से संबंधित ढेडिया नृत्य से लूटी वाहवाही
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-शरदोत्सव की आठवीं सांस्कृतिक संध्या रही उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के कलाकारों के नाम


संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। धौलरा मंदिर में चल रहे शरदोत्सव की आठवीं सांस्कृतिक संध्या उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के कलाकारों के नाम रही। इस सांस्कृतिक संध्या पर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के कुलपति डॉ. बिहारी लाल शर्मा ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की।
रांची विश्वविद्यालय के पूर्व उप कुलपति डॉ. एनएल नड्डा विशिष्ट अतिथि रहे। मुख्यातिथि व विशिष्ट अतिथि ने मां सरस्वती की तस्वीर के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ किया। मुख्यातिथि डॉ. बिहारी लाल शर्मा और दुर्गा पूजा की संस्थापिका डॉ. मल्लिका नड्डा ने सभी कलाकारों को सम्मानित किया। इस अवसर पर उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के कार्यक्रम अधिकारी राजेश बक्शी भी मौजूद रहे। उत्तराखंड के कलाकारों ने मां नंदा देवी की जातरा नृत्य की प्रस्तुति दी। नंदा देवी मां पार्वती के छह रूपों में से एक रूप मानी जाती हैं। समूचे गढ़वाल मंडल, कुमाऊं मंडल, समूचे हिमालय क्षेत्र में मां नंदा देवी की बेहद मान्यता है। उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने भगवान राम से संबंधित ढेडिया नृत्य की प्रस्तुति दी। ढेडिया नृत्य प्रयागराज का पारंपरिक लोकनृत्य है। यह मुख्य रूप से अश्विनी शुक्ल की चतुर्दशी को घर की महिला सदस्यों द्वारा किया जाता है। जब भगवान राम सीता और लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद प्रयागराज के संगम पर वापस पहुंचे तो देव शनि भी उनके पीछे चले आए और उनकी बुरी नजर उन पर पड़ गई। इसलिए उस नकारात्मकता को दूर करने के लिए प्रयागराज की महिलाओं ने ढेडिया नामक एक अनुष्ठान किया। इसमें उन्होंने अपने सिर और हाथों पर मिट्टी के जलते हुए छिद्रित बर्तनों को रखा और प्रभु राम, माता सीता व लक्ष्मण को आशीर्वाद दिए।
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मध्य प्रदेश के कलाकारों ने निमाड़ अंचल के प्रसिद्ध गणगौर की प्रस्तुति दी। इस नृत्य में नर्तकियां एक-दूसरे का हाथ पकड़े वृत्ताकार घेरे में गौरी मां से अपने पति की दीर्घायु की प्रार्थना करती हुई नृत्य करती हैं। इस नृत्य के गीतों का विषय शिव-पार्वती, ब्रह्मा-ब्राह्मणी तथा विष्णु-लक्ष्मी की प्रशंसा से भरा होता है। हरियाणा के कलाकारों ने हरियाणा के प्रसिद्ध प्राचीन लोकनृत्य घूमर की प्रस्तुति दी। कार्तिक माह महीने के बाद जब फसल कट जाती है और उसका विक्रय कर पैसा घर में आता है तो घर की औरतों द्वारा अपने पति से वस्त्र आभूषण इत्यादि की मांग किए जाने को इस नृत्य में दर्शाया गया।
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