मामले से जुड़े पंचायत पदाधिकारियों, पटवारी और लाभार्थी से 15,600 की रिकवरी का आदेश
खंड विकास अधिकारी को एक महीने में रिकवरी सुनिश्चित करने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत हिमाचल प्रदेश अपीलीय प्राधिकरण ने बिलासपुर जिले के घुमारवीं तहसील की बकरोआ ग्राम पंचायत में कार्यों में हुई अनियमितताओं के लिए एक अहम आदेश पारित किया। प्राधिकरण ने पंचायत पदाधिकारियों, लाभार्थी और राजस्व कर्मचारियों से 15,600 की रिकवरी का आदेश दिया है।
यह मामला मदन लाल द्वारा दायर की गई शिकायत पर आधारित है, जिसमें ग्राम पंचायत बकरोआ में मनरेगा के तहत हुए कार्यों में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। पहले जिला ओम्बुड्समैन बिलासपुर ने मामले की सुनवाई के बाद 3,120 की रिकवरी का आदेश दिया था। हालांकि, अपीलीय प्राधिकरण ने इसे संशोधित करते हुए संबंधित उत्तरदाताओं से कुल 15,600 की रिकवरी का निर्देश दिया। प्राधिकरण के आदेश के अनुसार ग्राम पंचायत बकरोआ के सचिव, पंचायत प्रधान, उपप्रधान, तकनीकी सहायक, ग्राम रोजगार सेवक, वार्ड सदस्य, पटवारी और अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मचारियों से 1,387 प्रति व्यक्ति की रिकवरी की जाएगी। इसके अलावा लाभार्थी जिसने मनरेगा का काम कराया था उसे 4507 रुपये रिकवरी देनी होगी। वहीं पटवारी को 1387 जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। यह राशि पहले से तय 3,120 और संशोधित रिकवरी 1,387 को मिलाकर है। आदेश में स्पष्ट किया गया कि संबंधित पदाधिकारियों ने कार्य में लापरवाही बरती और वित्तीय नियमों का उल्लंघन किया। खासतौर पर पटवारी हल्का की मौका रिपोर्ट में खसरा नंबर की सही प्रविष्टि नहीं होने और कार्य रिकॉर्ड में गड़बड़ी के लिए पटवारी की लापरवाही पाई गई।
इसके अलावा प्राधिकरण ने शिकायतकर्ता मदन लाल और ब्लॉक अधिकारी पर पहले जिला ओम्बुड्समैन बिलासपुर द्वारा लगाए गए 500 के जुर्माने को खारिज कर दिया। प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि जिला ओम्बुड्समैन की ओर से मामले को फोरेंसिक जांच के लिए भेजने की सिफारिश को निरस्त कर दिया गया है। खंड विकास अधिकारी घुमारवीं को आदेश दिया गया है कि सभी संबंधित व्यक्तियों से वसूली सुनिश्चित की जाए और राशि पंजाब नेशनल बैंक के खाता नंबर में जमा कर एक महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। प्राधिकरण ने दिसंबर 2024 में कार्यभार अधिक होने के कारण आदेश में देरी को बोनाफाइड बताते हुए इसे न्यायोचित ठहराया। आदेश की प्रति ग्रामीण विकास विभाग को भेज दी गई है ताकि इसे सभी संबंधित व्यक्तियों के बीच लागू किया जा सके और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।