एक साल की सजा और 12.19 लाख रुपये मुआवजा बरकरार
घुमारवीं से अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने सुनाया फैसला, ट्रायल कोर्ट का निर्णय सही ठहराया
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी की अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत द्वारा सुनाई गई एक वर्ष की साधारण कारावास की सजा और 12 लाख 19 हजार 195 रुपये मुआवजा पूरी तरह उचित और विधिसम्मत है।
मामले के अनुसार, हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक की शाखा शाहतलाई से वर्ष 2005 में 3.50 लाख रुपये का गृह ऋण लिया गया था। आरोप था कि लंबे समय तक किस्तें जमा न करने के बाद 27 अप्रैल 2017 को आरोपी ने बैंक के पक्ष में 12,19,195 रुपये का चेक जारी किया, जो बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त राशि के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद बैंक ने कानूनी नोटिस जारी किया, लेकिन भुगतान नहीं होने पर शिकायत दर्ज की गई। निचली अदालत ने सुनवाई के बाद आरोपी को दोषी मानते हुए एक वर्ष की साधारण कारावास और पूरी चेक राशि के बराबर मुआवजा देने का आदेश दिया था। अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि न तो कोई वास्तविक ऋण लिया गया था और न ही चेक किसी देनदारी के लिए जारी किया गया। यह भी कहा गया कि चेक गुम हो गया था और उसका दुरुपयोग किया गया। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि बैंक ऋण से जुड़े दस्तावेज साबित नहीं कर सका। अदालत ने दोनों पक्षों के साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों का विस्तार से अध्ययन किया। कोर्ट ने कहा कि चेक आरोपी के हस्ताक्षर से संबंधित है और इसका खंडन ठोस साक्ष्य से नहीं किया गया। बैंक की ओर से ऋण और देनदारी का रिकॉर्ड प्रस्तुत किया गया। गुमशुदगी की रिपोर्ट में चेक का स्पष्ट विवरण नहीं था। आरोपी ने चेक के भुगतान को रोकने की कोई कार्रवाई नहीं की। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि धारा 139 के तहत यह अनुमान लगाया जाता है कि चेक किसी वैध देनदारी के भुगतान के लिए ही जारी किया गया था, और इसे तोड़ने का भार आरोपी पर था, जिसे वह पूरा नहीं कर सका। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी। साथ ही आरोपी को निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का आदेश दियाहै। आदेश का पालन न करने पर सजा के निष्पादन की प्रक्रिया अपनाने को कहा गया है।