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खाद्य और पेट्रोलियम पदार्थों के साथ रद्दी के दामों में भी उछाल

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सुरेंद्र जंवाल
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घुमारवीं (बिलासपुर)। बढ़ती मंहगाई से हर कोई परेशान है। खाद्य और पेट्रोलियम पदार्थों के दाम तो बढ़े ही हैं लेकिन अब कागज की रद्दी के भाव भी आसमान छूने लगे हैं। इससे कागज के लिफाफे बना कर उन्हें दुकानदारों को बेचने वाले लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बाजारों में कोरोना काल के बाद से ही कागज की रद्दी कम हो रही है। रद्दी एकत्रित करने वाले लिफाफे बनाने वालों को 40 से 60 रुपये प्रति किलो के हिसाब से रद्दी बेच रहे हैं। जबकि कोरोना काल के पहले इसके दाम 10 से 15 रुपये प्रति किलोग्राम थे।
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जिले में बहुत से लोग कागजों के लिफाफे बनाकर अपनी और परिवार की रोजी चलाते हैं। लेकिन अब जैसे ही रद्दी की कीमतें बढ़ीं तो इन लोगों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बताते चलें कि कोरोना से पहले 100 लिफाफों का पैकेट 30 रुपये में मिलता था। अब उसकी कीमत 50 से 60 रुपये हो गई है। रद्दी मंहगी होने से केवल इस व्यवसाय से जुड़े लोगों पर ही असर नहीं पड़ा है बल्कि चाय, पकौड़े, मिठाई, फास्ट फूट, डेली नीड्स का छोटा-छोटा कारोबार करने वाले भी इससे प्रभावित हुए हैं।
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मंहगे दामों पर लिफाफे खरीदने के बाद इसकी कीमत की भरपाई ग्राहकों को करनी पड़ रही है। कबाड़ का व्यवसाय करने वाले रामू ने बताया कि कोरोना काल के बाद बाजार से रद्दी गायब हो गई है। यही कारण है कि इसके दामों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया कि बाजार में इसका दाम 50-60 रुपये प्रति किलो चला है। वहीं रद्दी न मिलने की हालत में कई लोग तो इसके मुंह मांगे दाम मांग रहे हैं। ऐसे में लिफाफे बनाने का काम करने वालों के लिए परेशानी हो गई है।
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