खैरियां में गोबिंद सागर झील के किनारे में फेंका गया कूड़ा।
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एक ओर देश में स्वच्छ भारत अभियान चला है। वहीं जिला बिलासपुर में लोगों के घरों, दुकानों और होटलों से निकलने वाला कूड़ा-कचरा सतलुज नदी में डाला जा रहा हैं। इस वजह से गोबिंद सागर झील दूषित होती जा रही है।
हैरानी इस बात की है एनजीटी के आदेशों बावजूद आज तक जिला में कूड़े का वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण करने के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। ऐसे में शहर से निकलने वाला सैकड़ों टन कूड़ा नदी में मिल रहा है।
हर रोज निकलता है चार टन कूड़ा
बिलासपुर शहर में हर रोज तीन से चार टन कूड़ा कचरा निकलता है। इसे नप की गाड़ियों में नदी किनारे डंप किया जा रहा है। ऐसे में जहां स्वच्छ भारत अभियान को ठेंगा दिखाया जा रहा हैं। वहीं एनजीटी के आदेशों की भी अवहेलना हो रही है। उल्लेखनीय है कि जिला बिलासपुर में शहर से निकलने वाले कूड़े कचरे को ठिकाने लगाने के कोई पुख्ता प्रबंधन नहीं है।
ऐसे में शहर से निकलने वाले कूड़े कचरे को सतलुज के साथ खैरियां में फेंका जा रहा है। शहर के टनों के हिसाब से निकलने वाला कचरा वहीं से सीधे सतलुज नदी में जा रहा हैं। ऐसे में गोबिंद सागर में भी प्रदूषण फैल रहा है। इससे मछलियों को भी नुकसान होने का खतरा बढ़ गया है। हालांकि नगर परिषद का दावा है कि कचरे को दबा दिया जाता है।
मगर मौके पर की तस्वीर कुछ और ही बयान कर रही है। ऐसे में जहां नगर परिषद की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में हैं। पूरे मामले को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी खामोश है। एनजीटी के साफ आदेश है कि नदी में किसी भी हाल में कूड़ा कचरा नहीं जाना चाहिए।
इस संबंध में नगर परिषद कार्यकारी अधिकारी केआर ठाकुर ने कहा कि इस पूरे कूड़े कचरे के ढेर पर मिट्टी की परत डाली जा रही है। उन्होंने साफ किया है कि कूड़े कचरे को किसी भी हाल में नदी में नहीं जाने दिया जाता है।