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Bilaspur News: एम्स बिलासपुर की स्किल लैब होगी हाईटेक, थोरेकोस्टॉमी ट्रेनर पर अभ्यास करेंगे डॉक्टर

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थोरेकोस्टॉमी ट्रेनर खरीदने की प्रक्रिया शुरू, टेंडर जारी
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छाती संबंधी जटिल प्रक्रियाओं का मिलेगा रियल टाइम अभ्यास
संस्थान में डॉक्टरों की ट्रेनिंग होगी और भी प्रभावी

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर स्किल लैब को आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल करने जा रहा है। संस्थान ने थोरेकोस्टॉमी एवं थोरेसेंटेसिस ट्रेनर की आपूर्ति के लिए औपचारिक रूप से निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कदम मेडिकल शिक्षा और प्रशिक्षण की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
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संस्थान प्रबंधन का मानना है कि आधुनिक सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण से न केवल प्रशिक्षु डॉक्टरों की दक्षता बढ़ेगी, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और उपचार की सफलता दर में भी सुधार होगा। खासतौर पर आपातकालीन परिस्थितियों में यह प्रशिक्षण अत्यंत उपयोगी साबित होगा। थोरेकोस्टॉमी ट्रेनर एक अत्याधुनिक मेडिकल सिम्युलेटर है, जो मानव शरीर के वक्ष (छाती) की संरचना को वास्तविक रूप में दर्शाता है। इसके माध्यम से डॉक्टर छाती में ट्यूब डालने, तरल पदार्थ निकालने और अन्य जटिल प्रक्रियाओं का अभ्यास कर सकते हैं। यह उपकरण विशेष रूप से उन स्थितियों के लिए उपयोगी है, जहां मरीज के फेफड़ों के आसपास हवा या तरल जमा हो जाता है, जैसे टेंशन न्यूमोथोरैक्स या प्लूरल इफ्यूजन। ऐसे मामलों में त्वरित और सटीक हस्तक्षेप जीवन रक्षक साबित होता है, और यही कौशल इस ट्रेनर के जरिए विकसित किया जाएगा। इस सिम्युलेटर की सबसे बड़ी खासियत इसका रियलिस्टिक डिजाइन है। इसमें वयस्क पुरुष के थोरैक्स का सटीक मॉडल तैयार किया गया है, जिससे प्रशिक्षुओं को असली मरीज जैसा अनुभव मिलता है। साथ ही, इसमें अल्ट्रासाउंड-गाइडेड तकनीक का प्रावधान है, जिससे डॉक्टर सुई, गाइडवायर और चेस्ट ड्रेन डालने की प्रक्रिया को सुरक्षित तरीके से सीख सकेंगे। इसमें कृत्रिम रक्त और तरल पदार्थ भरने की सुविधा भी होगी, जिससे प्रक्रिया के दौरान पॉप या गिव जैसा वास्तविक अहसास मिलेगा। यह ट्रेनर केवल सामान्य प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आपातकालीन स्थितियों जैसे टेंशन न्यूमोथोरैक्स में नीडल डिकम्प्रेशन का अभ्यास भी कराएगा। इससे डॉक्टर संकट की स्थिति में तेजी और सटीकता के साथ निर्णय लेने में सक्षम बनेंगे। इस पहल से संस्थान में मेडिकल शिक्षा और प्रशिक्षण को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। स्किल लैब में इस तरह के अत्याधुनिक उपकरणों के शामिल होने से यहां के डॉक्टरों को बिना किसी जोखिम के बार-बार अभ्यास करने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी दक्षता और आत्मविश्वास दोनों बढ़ेंगे। दीर्घकाल में यह पहल क्षेत्र के स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाला उपचार उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगी।
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