सिम्युलेशन मैनीकिन से प्रशिक्षित होंगे एमबीबीएस छात्र व रेजिडेंट डॉक्टर
जटिल प्रक्रियाओं में संस्थान के विशेषज्ञ हासिल करेंगे महारत
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश के लिए गौरव बन चुके एम्स बिलासपुर ने मेडिकल शिक्षा को और अधिक सुरक्षित, वैज्ञानिक व अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में अहम पहल की है। संस्थान अब भावी डॉक्टरों को जटिल और जोखिम भरे मेडिकल प्रोसीजर का प्रशिक्षण अत्याधुनिक सिम्युलेशन मैनीकिन (विशेष प्रशिक्षण पुतले) के माध्यम से देगा।
एम्स प्रशासन ने इसके लिए एनेस्थिसियोलॉजी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के तहत आवश्यक उपकरणों की खरीद को लेकर निविदा सूचना जारी कर दी है। इन मैनीकिन्स की मदद से छात्र और रेजिडेंट डॉक्टर वास्तविक मरीजों पर कार्य करने से पहले सुरक्षित माहौल में अभ्यास कर सकेंगे। वर्तमान में मेडिकल छात्रों को कई प्रक्रियाएं सीधे मरीजों पर सीखनी पड़ती हैं, जिनमें थोड़ी सी चूक भी गंभीर परिणाम ला सकती है। रीढ़ की हड्डी में इंजेक्शन (लंबर पंचर), गर्दन या सीने की बड़ी नसों में पाइप डालना (सेंट्रल लाइन), या आपात स्थिति में जान बचाने वाली तकनीकें अत्यंत संवेदनशील होती हैं। सिम्युलेशन मैनीकिन पर बार-बार अभ्यास से डॉक्टरों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, दक्षता में सुधार होगा और मानवीय भूल की संभावना न्यूनतम रह जाएगी। नये विशेष पुतले मानव शरीर की बनावट और प्रतिक्रिया की हूबहू नकल करते हैं। इनमें त्वचा, नसें और हड्डियां बिल्कुल असली जैसी होंगी, सुई डालने पर खून का आभास होगा, बार-बार प्रयोग योग्य सेल्फ-सीलिंग सिस्टम होंगे, अल्ट्रासाउंड से नसों की पहचान की सुविधा होगी। खास बातें यह है कि छात्र सेंट्रल लाइन मैनीकिन से गर्दन व सीने की मुख्य नसों में सुरक्षित तरीके से कैथेटर डालने का अभ्यास करेंगे। सुई लगते ही खून का फ्लैशबैक दिखाई देगा। लंबर पंचर मॉडल से रीढ़ की हड्डी के एल 2 से एल 5 तक के मनकों को छूकर पहचानने की सुविधा। सीएसएफ निकालने और स्पाइनल एनेस्थीसिया का अभ्यास संभव होगा। हीमलिच मैनीकिन से दम घुटने की स्थिति में जान बचाने वाली ‘हीमलिच तकनीक’ का वास्तविक अभ्यास होगा। छात्र अल्ट्रासाउंड मशीन से सही नस या स्थान पहचानने का व्यावहारिक प्रशिक्षण ले सकेंगे।