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Bilaspur News: एम्स बिलासपुर में शुगर मरीजों के लिए आधुनिक सुविधा की बड़ी तैयारी

Sat, 09 May 2026 11:58 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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अब सुई चुभाने की झंझट खत्म, सीजीएमएस से 24 घंटे होगी शुगर मॉनिटरिंग
शुगर का होगा पूरा ग्राफ तैयार, मरीज की शुगर कब, क्यों असंतुलित लगेगा पता
मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखकर शुरू होगी हाई-टेक तकनीक
-मरीजों को मिलेगा 24 घंटे रियल टाइम डेटा और अलर्ट सिस्टम

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर में अब शुगर मरीजों के इलाज को और अधिक सुविधाजनक, सुरक्षित और दर्द-रहित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन जल्द ही कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग सिस्टम को शुरू करने जा रहा है, जिससे मरीजों को बार-बार ब्लड सैंपल देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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इस सुविधा का मुख्य उद्देश्य मरीजों की दैनिक परेशानी को कम करना और इलाज को अधिक आरामदायक बनाना है, ताकि शुगर जांच जैसी प्रक्रिया उनके लिए बोझ न रहे। अभी तक शुगर मरीजों को दिन में कई बार ग्लूकोमीटर से शुगर जांच करनी पड़ती है, जिसमें सुई चुभाने की प्रक्रिया शामिल होती है। यह न केवल दर्दनाक है बल्कि लंबे समय में असुविधाजनक भी साबित होती है। नई सीजीएमएस तकनीक में त्वचा पर एक छोटा सा सेंसर लगाया जाएगा, जो बिना किसी दर्द के लगातार ग्लूकोज लेवल को मापता रहेगा। यह मरीज के शरीर के भीतर मौजूद तरल के आधार पर काम करता है, जिससे बार-बार ब्लड निकालने की जरूरत खत्म हो जाएगी। यह सिस्टम मरीजों को सिर्फ शुगर की जानकारी ही नहीं देगा, बल्कि 24 घंटे रियल टाइम डेटा भी उपलब्ध कराएगा। अगर शुगर लेवल अचानक बढ़ता या घटता है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट भी दे सकता है। इससे मरीज अपनी दिनचर्या, खानपान और दवाओं को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर सकेंगे। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और गंभीर डायबिटीज मरीजों के लिए यह सुविधा बेहद उपयोगी साबित होगी। यह सिस्टम केवल मरीजों के लिए ही नहीं, बल्कि डॉक्टरों के लिए भी एक महत्वपूर्ण सुविधा साबित होगा। यह शुगर का पूरा ग्राफ तैयार करेगा, जिससे डॉक्टर यह समझ सकेंगे कि मरीज की शुगर कब और क्यों असंतुलित हो रही है। इस डेटा के आधार पर इलाज को अधिक सटीक और व्यक्तिगत बनाया जा सकेगा, जिससे मरीजों को बेहतर परिणाम मिलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल मरीजों के लिए केवल तकनीकी सुधार नहीं बल्कि सुविधा आधारित स्वास्थ्य सेवा की दिशा में बड़ा बदलाव है। इससे अस्पताल में आने वाले मरीजों का समय बचेगा, दर्द कम होगा और इलाज की गुणवत्ता में सुधार आएगा। इस नई सुविधा के लागू होने के बाद शुगर मरीजों के लिए इलाज अधिक आसान, सुरक्षित और आरामदायक हो जाएगा। यह कदम न केवल तकनीकी उन्नति है बल्कि मरीजों की दैनिक परेशानियों को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी है।
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