बरठीं (बिलासपुर)। किसानों को गेहूं की बिजाई की चिंता सताने लगी है। कृषि विभाग की ओर से हर बार घटिया किस्म का बीज देने पर किसानों में रोष है। किसानों का आरोप है कि कृषि विभाग की ओर से जो गेहूं का बीज दिया जाता है वह उन्नत किस्म का नहीं होता है। इससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है।
क्षेत्र के किसानों नरेश सहोड़, रामेश्वर कौशल, प्रणवीर, संतोषी, जगदीश चंद्र, रूपलाल, सुरेंद्र कौशल, तिलक राज, रणजीत सिंह, बासुदेव ठाकुर, हरि सिंह ठाकुर, हंसराज, देवराज गौतम, ऋषि राम गौतम, इंद्र सिंह, शमशेर सिंह, ईश्वर ठाकुर, चिरंजी लाल सहित अन्यों ने बताया कि विभाग उन्नत किस्म के गेहूं के बीज का झांसा देकर घटिया किस्म का बीज किसानों को उपलब्ध करवाता है। इस कारण गेहूं की फसल तैयार होने से पहले ही कई बीमारियों की चपेट में आ जाती है। उन्होंने बताया कि गेहूं में पीला रतुआ, कालापन, कमजोर दाने सहित अन्य बीमारियां लग जाती हैं। इस कारण सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक आए दिन किसानों की आय दोगुनी करने की बात करते हैं। उन्नत किस्म के बीज खेतों में डालने की बातें करते हैं।
किसानों ने कहा कि वैज्ञानिकों की बात मानकर उन्होंने वैज्ञानिक ढंग से खेती करना शुरू किया है। लेकिन जब घटिया बीज उपलब्ध करवाया जाता है तो किसानों की आय दुगनी कैसे हो सकती है। उन्होंने विभाग और सरकार से मांग की है कि इस बार गेहूं का उन्नत किस्म का बीज मिलना चाहिए। किसानों को देने से पहले बीज की अच्छी तरह से जांच होनी चाहिए।
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गेहूं की फसल में टिल्ट दवाई का स्प्रे करना जरूरी : कुलदीप पटियाल
उधर, कृषि विभाग के उपनिदेशक कुलदीप पटियाल ने बताया कि वर्तमान में एचपी डब्ल्यू ग्रुप की 349, 368 व 373 किस्म का लगभग 4200 किलोग्राम गेहूं बीज सभी विक्रय केंद्रों पर पहुंच चुका है। इनमें बीमारियों का कम प्रकोप रहता है। उन्होंने बताया कि बीमारियों से बचने के लिए गेहूं की फसल में टिल्ट दवाई का स्प्रे करना अति आवश्यक है। बीमारियों का प्रकोप मौसम पर भी निर्भर करता है। अभी तक कोई भी ऐसा बीज तैयार नहीं हुआ है जो बीमारी रहित हो। 5 से 10 प्रतिशत बीमारियां मौसम व खेत के हिसाब से लगना स्वाभाविक है।