पहले 10-15 हजार मीट्रिक टन रोजाना मिलती थी ढुलाई, अब 2-3 हजार टन पर सिमटी
डीए, मालभाड़ा बढ़ोतरी और एग्रीमेंट नवीनीकरण की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बरमाणा में सीमेंट और क्लिंकर की ढुलाई का काम पिछले करीब चार माह से लगातार कम होने का मामला अब बिलासपुर जिला ट्रक सोसायटी में भी तूल पकड़ने लगा है। बुधवार को विपक्षी गुट ने सांकेतिक हड़ताल कर प्रबंधन और प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया। गुट का दावा है कि पहले जहां रोजाना करीब 10 से 15 हजार मीट्रिक टन माल ढुलाई का काम मिलता था, वहीं अब यह घटकर करीब दो से तीन हजार मीट्रिक टन रह गया है। काम में आई इस कमी से ट्रक ऑपरेटरों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
बुधवार दोपहर करीब तीन बजे विपक्षी गुट के सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए सांकेतिक हड़ताल की। इस दौरान पूर्व अध्यक्ष लेखराम वर्मा, पूर्व प्रधान नीलम चंदेल, पूर्व नियंत्रक ध्यान सिंह ठाकुर, राजेश ठाकुर, रतनलाल, विकास भार्गव और सुभाष कपिल समेत करीब 10 सदस्य मौजूद रहे। विपक्षी गुट ने स्पष्ट किया कि बुधवार का प्रदर्शन आने वाली हड़ताल के लिए ट्रांसपोर्टरों और चालकों को लामबंद करने की कवायद भी है। विपक्षी गुट के पूर्व महासचिव सुरेश चौधरी ने कहा कि छह सितंबर को उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार को ज्ञापन देकर सीमेंट और क्लिंकर की ढुलाई में आई भारी कमी का मामला उठाया गया था। इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि ढुलाई का काम अचानक इतना कम होने से ट्रकों के संचालन पर असर पड़ा है और ऑपरेटरों को अपने वाहनों का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रक ऑपरेटरों के सामने सिर्फ काम की कमी ही नहीं, बल्कि डीजल, रखरखाव, चालक का खर्चा और अन्य लागत भी लगातार बनी हुई है। ऐसे में ढुलाई कम होने का सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ रहा है। पूर्व अध्यक्ष लेखराम वर्मा ने कहा कि ट्रांसपोर्टर किसी राजनीतिक उद्देश्य से आंदोलन नहीं कर रहे हैं। उनका संघर्ष अपने हक और रोजी-रोटी के लिए है। उन्होंने कहा कि ऑपरेटरों को अनुबंध के अनुसार काम मिलना चाहिए। यदि किसी स्तर पर चूक हुई है तो उसका खामियाजा ट्रांसपोर्टरों को नहीं भुगतना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब ट्रांसपोर्टरों के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। पूर्व प्रधान नीलम चंदेल ने दाड़लाघाट और बरमाणा परियोजनाओं में माल ढुलाई के काम के वितरण पर सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि स्पष्ट किया जाए कि दोनों परियोजनाओं में ट्रांसपोर्टरों के बीच काम का बंटवारा किस आधार पर हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से प्रबंधन और ट्रांसपोर्टरों के दोनों पक्षों को एक साथ बैठाकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। विपक्षी गुट ने अप्रैल से लंबित डीए जारी करने की मांग भी उठाई। इसके अलावा अनुबंध के अनुसार बढ़ोतरी देने, एग्रीमेंट का नवीनीकरण करने और माल ढुलाई का काम बढ़ाने की मांग की। इन मांगों पर जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा। बुधवार को सांकेतिक हड़ताल के बाद विपक्षी गुट ने वीरवार को होने वाली हड़ताल में अधिक से अधिक ट्रक ऑपरेटरों और चालकों से शामिल होने की अपील की। बीडीटीएस की वर्तमान कार्यकारिणी के महासचिव प्रदीप ठाकुर ने कहा कि सभा के सभी 21 सदस्य एकजुट हैं और ट्रांसपोर्टरों के हितों के लिए मिलकर संघर्ष करेंगे। उन्होंने कहा कि डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और अन्य खर्चों को देखते हुए मालभाड़े में उचित बढ़ोतरी जरूरी है। ट्रांसपोर्टरों के हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।