एम्स में धरने पर बैठे सिक्योरिटी गार्ड और ग्रामीण। संवाद
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बिलासपुर। कोठीपुरा में निर्माणाधीन एम्स में कार्यरत सिक्योरिटी गार्डों और स्थानीय लोगों में बैक डोर सुरक्षा कर्मियों की भर्ती के खिलाफ रोष है। सोमवार को एम्स का मेन गेट बंद करके धरना-प्रदर्शन किया। उपायुक्त के आश्वासन के बाद भी लोग धरने पर बैठे रहे।
एम्स के मेन गेट पर धरना-प्रदर्शन की वजह से कोई भी गाड़ी अंदर नहीं जा सकी। हालांकि एंबुलेंस को जाने दिया जा रहा था। मरीजों को मेन गेट से आगे पैदल ही जाना पड़ा। एम्स के अधिकारियों व कर्मचारियों को भी गेट पर ही गाड़ियों से उतरना पड़ा। इस धरना-प्रदर्शन के कारण एम्स के कर्मचारियों और मरीजों को परेशानी से जूझना पड़ा। सूचना मिलते ही उपायुक्त बिलासपुर पंकज राय मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि बुधवार को एम्स प्रबंधन के साथ वार्ता कर उनकी मांग को पूरा करेंगे। सुरक्षा कर्मियों ने उपायुक्त के आश्वासन और मरीजों की परेशानी को देखते करीब दो घंटे बाद मेन गेट खोल दिया, लेकिन धरना-प्रदर्शन जारी रखा। सुरक्षा कर्मियों का कहना है कि वे पिछले चार साल से एम्स में काम कर रहे हैं। उन्हें आश्वासन ही मिल रहे हैं कि जब भी स्थायी नियुक्तियां होंगी उन्हें वरीयता दी जाएगी।
सुरक्षा कर्मियों का कहना है कि अब एम्स में आईपीडी सेवाओं के उद्घाटन की तैयारी चल रही है। इसके लिए नई नियुक्तियां भी शुरू हो चुकी हैं, लेकिन जब स्थायी नियुक्ति का मौका आया तो उन्हें दरकिनार करके बैक डोर से सिक्योरिटी गार्ड रखे जा रहे हैं। धरने पर बैठे स्थानीय लोगों ने भी रोजगार के मामले में अनदेखी का आरोप लगाया। उनकी अगुवाई कर रही अर्द्धनारेश्वर समाज सेवा समिति की अध्यक्ष बिजली महंत ने कहा कि विभिन्न स्तरों पर मिल रहे आश्वासनों से स्थानीय युवाओं ने एम्स में रोजगार की उम्मीद लगा रखी थी, लेकिन अब उन्हें दरकिनार करके बाहरी लोगों को नियुक्तियां देने से वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। इस तरह की मनमानी सहन नहीं की जाएगी।