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Bilaspur News: आरटीआई में पुष्टि के बाद राज्य सूचना आयुक्त कार्यालय की गाड़ियों पर उठा सवाल

Mon, 25 Aug 2025 11:46 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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बिना चले और बिना चालक के हो रही है एक साल से गाड़ी की मेंटेनेंस

वर्तमान में राज्य सूचना आयुक्त कार्यालय में कुल चार गाड़ियां मौजूद
सरकारी गाड़ी पौने छह साल से गैराज में खड़ी, निजी टैक्सी का भर रहे हर माह 40 हजार

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त कार्यालय से जुड़ा एक मामला चौंकाने वाला है। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी से पता चला है कि यहां एक गाड़ी का पिछले करीब पौने छह साल से कोई उपयोग नहीं हो रहा, बावजूद इसके उसकी नियमित मेंटेनेंस कराई जा रही है।
इतना ही नहीं, कार्यालय में पहले से तीन सरकारी गाड़ियां मौजूद होने के बावजूद सरकार ने एक निजी टैक्सी को भी हर महीने मोटी रकम पर अनुबंधित कर रखा है। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार गाड़ी नंबर एचपी 07 बी 0275 टोयोटा इटियोज की लॉग बुक का अवलोकन किया तो पता चला कि 26 अप्रैल 2024 को यह गाड़ी बिना चालक और बिना चले ही ठाकुर ऑटो केयर, फागली चौक शिमला में दर्ज हुई। वहीं इसकी सर्विस और मेंटेनेंस का बिल भी बना। हैरानी की बात यह रही कि यह गाड़ी बिना मूवमेंट के ही वापस कार्यालय के गैरेज तक पहुंच गई। इस बिल को 2 मई 2024 को स्वीकृत कर दिया गया। जानकारी में यह भी दर्ज है कि यह गाड़ी अब तक मात्र 1,17,575 किलोमीटर ही चली है और पिछले करीब पौने छह साल से इससे कोई काम नहीं लिया जा रहा है। बताया गया है कि वर्तमान में राज्य सूचना आयुक्त कार्यालय में कुल चार गाड़ियां मौजूद हैं। इनमें टोयोटा कोरोला अल्टिस एचपी 07बी 0014, टोयोटा इनोवा क्रिस्टा एचपी 070070, टोयोटा इटियॉस एचपी 07 बी 0275, होंडा अमेज एचपी 01 ए 0560 निजी टैक्सी है।
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आरटीआई में खुलासा हुआ कि इन तीन सरकारी गाड़ियों के रहते हुए भी सरकार ने एक निजी होंडा अमेज टैक्सी को अनुबंधित किया हुआ है। इस टैक्सी पर हर महीने 40,950 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि जब उक्त निजी गाड़ी की उपयोगिता और अनुबंध से जुड़ी सूचना मांगी गई तो कार्यालय ने इसे थर्ड पार्टी सूचना बताते हुए जानकारी देने से इंकार कर दिया। इससे संदेह है कि कहीं यह गाड़ी बिना कागजात के तो चलाई नहीं जा रही। सूचना मांगने वाले का कहना है कि इस मामले में और भी कई खुलासे हो सकते हैं। गौरतलब है कि राज्य सूचना आयुक्त कार्यालय ही वह अंतिम संस्थान है, जहां से सूचना उपलब्ध करवाने या रोकने के आदेश जारी होते हैं। इस मामले की पुष्टि जन सूचना अधिकारी एवं असिस्टेंट रजिस्ट्रार एमएस राव ने पत्र संख्या एसआइसी-151/2025-2002 में की है।
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