ड्रग-फ्री पंचायत बनाने पर जोर, विशेष निगरानी के साथ आईईसी गतिविधियां होंगी संचालित
जागरूकता से लेकर पुनर्वास तक रहेगा प्रशासन का फोकस
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में बढ़ते नशे के खतरे से निपटने के लिए प्रशासन पंचायत स्तर पर अभियान तेज करेगा। जिले की 27 पंचायतों को रेड जोन के रूप में चिह्नित किया गया है। इन पंचायतों में विशेष निगरानी के साथ नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। प्रशासन ने पंचायतों से केवल जागरूकता कार्यक्रम कराने के बजाय अपनी पंचायत को ड्रग-फ्री घोषित करने की दिशा में ठोस पहल करने का आह्वान किया है। इसके लिए सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) गतिविधियों के संचालन के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से वित्तीय सहायता भी दी जा रही है। सोमवार को संस्कृति सदन बिलासपुर में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से राष्ट्रीय मादक पदार्थ मांग न्यूनीकरण कार्ययोजना के तहत एक दिवसीय हितधारक कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें उपायुक्त राहुल कुमार ने नशे के खिलाफ प्रशासन की रणनीति साझा की। उन्होंने कहा कि नशामुक्त बिलासपुर बनाने के लिए केवल पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। पंचायतों, परिवारों, स्कूलों, सामाजिक संस्थाओं, युवाओं और आम लोगों की सामूहिक भागीदारी जरूरी है। उपायुक्त ने बताया कि जिला प्रशासन के प्रहार अभियान से अब तक एक लाख से अधिक लोगों को नशा विरोधी मुहिम से जोड़ा जा चुका है। इसमें विद्यार्थी, युवा, वरिष्ठ नागरिक और सामाजिक संगठनों ने भाग लिया है। उन्होंने कहा कि जागरूकता को गांव और पंचायत स्तर तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि नशे की समस्या गंभीर होने से पहले उसकी पहचान कर समय पर हस्तक्षेप किया जा सके। उन्होंने कहा कि नशे की गिरफ्त में आने के बाद उपचार और पुनर्वास जरूरी हैं, लेकिन युवाओं को नशे से बचाना अधिक प्रभावी उपाय है। पंचायतों में ग्राम सभाओं, खेल प्रतियोगिताओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, मैराथन और वॉकथॉन जैसी गतिविधियों के जरिये सकारात्मक माहौल तैयार किया जा सकता है। अभिभावकों और शिक्षकों से बच्चों की गतिविधियों पर सकारात्मक निगरानी रखने की अपील की गई। उपायुक्त ने कहा कि बिलासपुर की पहचान नशे की समस्या से नहीं, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन गतिविधियों से होनी चाहिए। पैराग्लाइडिंग, जल क्रीड़ा और ट्रैकिंग जैसी गतिविधियों से युवाओं को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है। उन्होंने लोगों से ड्रग-फ्री बिलासपुर बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। कार्यशाला में पुलिस अधीक्षक अभिषेक धीमान ने नशे की रोकथाम के लिए पुलिस के प्रयासों की जानकारी दी। अतिरिक्त उपायुक्त रूपिंदर कौर भी मौजूद रहीं। तकनीकी सत्रों में विभिन्न संस्थाओं के विशेषज्ञों ने नशा उन्मूलन पर विचार रखे। कार्यक्रम में पंचायतीराज संस्थाओं के प्रतिनिधि, विभिन्न विभागों के अधिकारी, स्वयंसेवी संस्थाओं और शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि तथा विद्यार्थी मौजूद रहे। इस अवसर पर नशामुक्त युवा, विकसित भारत पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।
चिट्टे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस : उपायुक्त
उपायुक्त ने कहा कि प्रदेश सरकार चिट्टे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। जिला पुलिस ने हाल के महीनों में नशा तस्करों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर कई मामले दर्ज किए हैं। बाहरी राज्यों से जुड़े सप्लाई नेटवर्क पर भी कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि नशे की सप्लाई रोकने के साथ उसकी मांग कम करना भी जरूरी है। प्रशासन नशामुक्त युवाओं के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता पर भी ध्यान देगा। रेडक्रॉस और गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। युवाओं को खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रहार अभियान से एक लाख से अधिक लोग जुड़े
जिला प्रशासन के प्रहार अभियान के माध्यम से अब तक एक लाख से अधिक लोगों को नशा विरोधी मुहिम से जोड़ा जा चुका है। अभियान में विद्यार्थियों, युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने भागीदारी की है। अब इसे गांव और पंचायत स्तर तक विस्तार देने पर जोर दिया जा रहा है।