फोरलेन प्रभावित समिति के लगातार पत्रों के बाद उपायुक्त कार्यालय ने विशेष भू-अर्जन अधिकारी से मांगी जानकारी
पूछा, एसएलएयू की स्थापना किस वर्ष और किस अधिसूचना के तहत हुई
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना से प्रभावित लोगों के मामलों को लेकर फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति की ओर से लगातार उठाए जा रहे सवालों के बाद जिला प्रशासन ने विशेष भू-अर्जन इकाई (एसएलएयू) की स्थापना से संबंधित जानकारी मांगी है। समिति की ओर से मुख्यमंत्री समेत विभिन्न अधिकारियों को 38वां स्मरण पत्र भेजे जाने के बाद उपायुक्त कार्यालय ने विशेष भू-अर्जन अधिकारी को पत्र जारी किया है। रिमाइंडर में पूछा है कि बकी स्थापना किस वर्ष और किस अधिसूचना के तहत हुई थी। साथ ही स्थापना से संबंधित अधिसूचना उपलब्ध करवाने को भी कहा गया है, ताकि मामले में नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जा सके। उपायुक्त कार्यालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति की ओर 28 मई से 2 जून, 2026 के बीच भेजे गए विभिन्न आवेदन पत्रों के आधार पर विशेष भू-अर्जन अधिकारी से आवश्यक जानकारी मांगी गई है। पत्र में कार्यालय की स्थापना से संबंधित अधिसूचना उपलब्ध कराने और स्थापना का वर्ष स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। समिति के महासचिव मदन लाल ने 3 जुलाई को भेजे गए 38वें स्मरण पत्र में कहा है कि यदि एसएलएयू की स्थापना किसी अधिसूचना के तहत हुई है तो उसकी प्रति सार्वजनिक की जाए। यदि ऐसी कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई, तो यह स्पष्ट किया जाए कि यह इकाई किस आधार पर स्थापित की गई। समिति ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या बिना अधिसूचित किए उक्त इकाई विधिवत अस्तित्व में है या नहीं। समिति का कहना है कि यदि इकाई के गठन संबंधी कोई अधिसूचना मौजूद नहीं है, तो यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि वह किस आधार पर भूमि, मकानों, पेड़ों तथा अन्य परिसंपत्तियों से संबंधित कार्यों और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को अंजाम देती रही है।
जांच और तथ्य सार्वजनिक करने की मांग उठाई मांग
समिति ने अपने 38वें स्मरण पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव, मुख्यमंत्री के निजी सचिव, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण तथा संबंधित भू-अर्जन अधिकारियों को भी भेजी है। समिति ने मामले की निष्पक्ष जांच कर तथ्य सार्वजनिक करने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। समिति के महासचिव मदन लाल का कहना है कि लगातार पत्राचार के बाद अब प्रशासन ने इस विषय पर संज्ञान लिया है। उनका कहना है कि समिति का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि विशेष भू-अर्जन इकाई की स्थापना और उसका संचालन निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप हुआ है तथा पूरे मामले में पारदर्शिता बनी रहे।